जानकारी के अनुसार, यशवंत सिंह चौहान ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) रुद्रप्रयाग को सूचना दी थी कि उनके भाई प्रवेश चौहान अपने पांच साथियों के साथ ट्रैकिंग के लिए निकले हैं। संपर्क नहीं होने के कारण परिवार के लोग उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने संभावित स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क शुरू किया।
डीईओसी रुद्रप्रयाग ने मामले की जानकारी पुलिस नियंत्रण कक्ष रुद्रप्रयाग और वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी को दी। इसके साथ ही 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार और रुद्रप्रयाग से भी समन्वय स्थापित किया गया। प्रशासन की ओर से ट्रैकिंग दल के संभावित मार्ग, उनकी गतिविधियों और अंतिम संपर्क से संबंधित जानकारी जुटाई जाने लगी।
प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक ट्रैकिंग दल में प्रवेश चौहान, फोरेस्टर वन विभाग उत्तरकाशी, अमित फर्सवाण, नवीन रावत, विवेक और संजय सिंह रावत शामिल थे। ये सभी रुद्रप्रयाग जनपद से जुड़े बताए गए हैं। दल के केदारनाथ से आगे बढ़ने और ऑडिन कोल होते हुए गंगोत्री जाने की योजना थी।
कई दिनों तक संपर्क नहीं होने से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती गई। पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण प्रशासन ने भी मामले में सतर्कता बरती। संभावित ट्रैक रूट और संबंधित विभागों से जानकारी जुटाकर ट्रैकरों की स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया गया। इस दौरान प्रशासन ने विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखा।
बुधवार सुबह करीब 11:45 बजे डीईओसी रुद्रप्रयाग ने सूचना देने वाले यशवंत चौहान से दोबारा संपर्क किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को बताया कि ट्रैकिंग दल के सभी सदस्यों से संपर्क हो गया है और सभी सुरक्षित हैं। जानकारी सामने आई कि ट्रैकर गंगी-घुत्तू, टिहरी की ओर से आगे निकल गए थे। इसी वजह से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था।
सभी ट्रैकरों के सुरक्षित होने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन और परिजनों ने राहत की सांस ली। किसी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। प्रशासन के अनुसार फिलहाल सभी ट्रैकर सुरक्षित हैं।
यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम ट्रैकिंग रूटों पर नेटवर्क कनेक्टिविटी और संचार व्यवस्था की चुनौती को सामने लाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण ट्रैकिंग दलों से संपर्क टूट सकता है। ऐसे में ट्रैक पर जाने वाले दलों की गतिविधियों, मार्ग और निर्धारित कार्यक्रम की जानकारी संबंधित प्रशासन के पास होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
केदारनाथ-बासुकीताल और आसपास के उच्च हिमालयी ट्रैक उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। ऐसे में ट्रैकिंग दलों को निर्धारित नियमों का पालन करने और अपनी यात्रा की जानकारी संबंधित अधिकारियों के साथ साझा करने की सलाह दी जाती है।


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