अर्द्धकुंभ की तैयारियों के तहत शहर में विभिन्न व्यवस्थाओं और तकनीकी निगरानी से जुड़े कार्यों के लिए इस ड्रोन को मंगाया गया था। हालांकि, उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद ड्रोन लापता हो गया। काफी तलाश के बावजूद जब उसका पता नहीं चला तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई। ड्रोन की कीमत लगभग 40 लाख रुपये होने के कारण इसकी गुमशुदगी को गंभीरता से लिया गया।
उड़ान भरते ही लापता हो गया था ड्रोन
जानकारी के अनुसार, अर्द्धकुंभ की तैयारियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला ड्रोन उड़ान के दौरान अचानक लापता हो गया था। इसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई, लेकिन शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली। ड्रोन की लोकेशन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने उसे खोजने की चुनौती खड़ी हो गई थी।
मामले में आईआईटी रुड़की के कर्मचारी शिवम नौटियाल की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। इसके आधार पर हरिद्वार शहर कोतवाली में ड्रोन के लापता होने के संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस भी मामले की जानकारी जुटाने और ड्रोन का पता लगाने में लगी हुई थी।
दूसरे ड्रोन और जीपीएस से मिली मदद
लगातार तलाश के बाद कर्मचारियों ने दूसरे ड्रोन की सहायता लेने का निर्णय लिया। इसके जरिए मनसा देवी मंदिर की पहाड़ियों में खोज अभियान चलाया गया। जीपीएस तकनीक की मदद से लापता ड्रोन की लोकेशन का पता लगाने में सफलता मिली।
करीब 36 घंटे तक चले प्रयासों के बाद ड्रोन पहाड़ियों में मिल गया। ड्रोन बरामद होने से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली। इसकी कीमत अधिक होने के कारण इसके सुरक्षित मिलने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अर्द्धकुंभ की तैयारियों के बीच राहत
हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न व्यवस्थाएं की जा रही हैं। ऐसे में तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी उद्देश्य से आईआईटी रुड़की से ड्रोन मंगाया गया था।
ड्रोन के लापता होने से उसकी तलाश को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब उसके मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों और पुलिस ने राहत महसूस की है। हालांकि, ड्रोन उड़ान भरने के बाद किन परिस्थितियों में लापता हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इस घटना ने महंगे तकनीकी उपकरणों के संचालन, उनकी निगरानी और उड़ान के दौरान जीपीएस लोकेशन पर नजर बनाए रखने की अहमियत को भी सामने रखा है।




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