प्राप्त जानकारी के अनुसार, वी-मार्क इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास गर्ग के पिता वेद प्रकाश गर्ग का रविवार को निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। इस कठिन घड़ी में विकास गर्ग ने अपने पिता की स्मृति को मानवता की सेवा से जोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने शोक के बीच भी नेत्रदान को प्राथमिकता देते हुए परिवार की ओर से इस पुनीत कार्य की पहल की।
मित्र की मदद से पूरी हुई नेत्रदान की प्रक्रिया
पिता का नेत्रदान कराने के लिए विकास गर्ग ने अपने मित्र और दधीचि देहदान समिति के संरक्षक संजीव गुप्ता से संपर्क किया। संजीव गुप्ता ने इस संबंध में समिति के अध्यक्ष सुभाष चांदना को जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद समिति ने तत्काल आवश्यक कदम उठाए और एम्स ऋषिकेश के नेत्रदान विभाग से संपर्क किया।
जानकारी मिलते ही एम्स ऋषिकेश से डॉ. प्रियंका मटोला और उनके सहयोगी पवन शिवालिकनगर पहुंचे। चिकित्सकीय टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई। इस तरह परिवार के दुख की घड़ी में लिया गया एक निर्णय जरूरतमंद लोगों के लिए नई उम्मीद बन गया।
नेत्रदान के माध्यम से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को रोशनी मिलने की संभावना बनेगी। किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसके अंग और ऊतक दूसरे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। विकास गर्ग का यह कदम इसी मानवीय भावना को दर्शाता है कि सेवा और संवेदनशीलता के लिए परिस्थितियां बाधा नहीं बननी चाहिए।
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष सुभाष चांदना ने वेद प्रकाश गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने विकास गर्ग के निर्णय को सराहनीय और अनुकरणीय बताते हुए कहा कि दूसरे लोगों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से नेत्रदान और देहदान के महत्व को समझने तथा इस दिशा में आगे आने की अपील की।
समिति की ओर से नेत्रदान या देहदान करने के इच्छुक लोगों के लिए संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं। इच्छुक व्यक्ति मोबाइल नंबर 9410326582 और 9411111675 पर संपर्क कर सकते हैं।
विकास गर्ग की यह पहल बताती है कि अपनों को खोने के बाद भी उनके माध्यम से किसी दूसरे के जीवन में खुशियां लाने का रास्ता चुना जा सकता है। उनका यह निर्णय समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद देने वाला है।




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