अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की जांच की मांग कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति को तब तक रोका जाए, जब तक उनकी बेटी की हत्या से संबंधित चल रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी नहीं हो जाती। दुष्यंत कुमार गौतम को 12 अक्टूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
पहले भी परिवार से मिल चुके हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी इससे पहले अगस्त में भी अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर चुके हैं। उस समय उन्होंने मामले में न्याय मिलने में हो रही देरी पर चिंता जताई थी। राहुल गांधी ने कहा था कि चार साल बीत जाने के बावजूद परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। बुधवार को इंडिया गेट पहुंचकर उन्होंने एक बार फिर पीड़ित परिवार के प्रति समर्थन जताया।
कांग्रेस नेताओं की इस मुलाकात के बीच अंकिता हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। परिवार और इस मामले में न्याय की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
2022 में हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के निकट वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना के चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य के बेटे हैं, और उनके दो सहयोगियों को दोषी ठहराया गया था। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इस हत्याकांड के बाद पूरे उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले में एक अज्ञात वीआईपी की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठे, जिसके बाद परिवार और सामाजिक संगठनों ने इस पहलू की जांच की मांग की।
न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग
अंकिता के माता-पिता लगातार मांग कर रहे हैं कि मामले की जांच में किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। दुष्यंत कुमार गौतम को लेकर परिवार ने आरोप लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।
इंडिया गेट पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मुलाकात के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। परिवार की प्रमुख मांग है कि जांच पूरी पारदर्शिता से हो और उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय मिले।




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