जानकारी के अनुसार, अंकिता के माता-पिता राजघाट पर अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर धरना दे रहे थे। इसी दौरान पुलिस उन्हें वहां से अपने साथ ले गई। सामाजिक कार्यकर्ता और एनजीओ संचालिका योगिता भयाना ने सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अंकिता के माता-पिता को काफी देर तक इधर-उधर घुमाती रही। इसी दौरान सोनी देवी की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
गणेश गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने घटना पर नाराजगी जताते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता को इंडिया गेट के पास से दिल्ली पुलिस जबरन अपने साथ ले गई और करीब दो घंटे तक इधर-उधर घुमाती रही। बाद में मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
गोदियाल ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले अंकिता के माता-पिता को इस तरह परेशान करना, डराना और धमकाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता शांतिप्रिय लोग हैं और उनसे किसी को कोई खतरा नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि उन्हें तत्काल रिहा किया जाए और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
हरक सिंह रावत ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने भी इस मामले पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि अंकिता के माता-पिता जब भी इंडिया गेट की तरफ जाते हैं, उन्हें पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मामले को लेकर असहज है और इसी वजह से पीड़ित परिवार को परेशान किया जा रहा है।
हरक सिंह रावत ने दिल्ली में रहने वाले उत्तराखंड के प्रवासियों से अंकिता के माता-पिता की मदद के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में परिवार को सहयोग और न्याय की लड़ाई में साथ देने की जरूरत है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
पौड़ी गढ़वाल के श्रीकोट डोभ गांव की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास यमकेश्वर ब्लॉक के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। इसके छह दिन बाद 24 सितंबर को उसका शव चीला बैराज क्षेत्र की नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों अंकित गुप्ता तथा सौरभ भास्कर को दोषी ठहराया गया। 30 मई 2025 को अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले से जुड़े कथित वीआईपी एंगल और अन्य सवालों को लेकर सीबीआई जांच भी चल रही है।
अंकिता के माता-पिता लगातार अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष जवाब सामने लाने की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में हुई इस घटना के बाद एक बार फिर अंकिता हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।




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