मंगलवार को गैरसैंण स्थित विधानसभा परिसर में सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उमेश कुमार ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि खानपुर की जनता ने उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा था। इसके बाद से उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं, किसानों की परेशानियों और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया।
विधायक ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष से सहयोग की उम्मीद की, लेकिन उन्हें बार-बार निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि हरिद्वार क्षेत्र में किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को लेकर कोई भी मजबूती से उनके साथ खड़ा नहीं हुआ। किसानों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने विपक्ष से समर्थन की अपेक्षा की थी, लेकिन उन्हें निराशा मिली।
उमेश कुमार ने कहा कि वह विपक्ष के धरने-प्रदर्शनों में लगातार शामिल होते रहे हैं। विधानसभा में विरोध प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने विपक्षी विधायकों का साथ दिया। यहां तक कि विधानसभा के वेल में रात बिताने जैसे विरोध कार्यक्रमों में भी वह उनके साथ खड़े रहे। इसके बावजूद, जब उन्हें किसानों और जनता से जुड़े मुद्दों पर समर्थन की जरूरत पड़ी, तो विपक्ष पीछे हट गया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार उम्मीद की कि जनहित के बड़े मुद्दों पर विपक्ष उनकी आवाज को मजबूती देगा और सरकार के सामने जनता की समस्याओं को उठाने में सहयोग करेगा। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। इसी निराशा के चलते उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया है।
भाजपा और कांग्रेस में जाने से किया इनकार
विधायक उमेश कुमार ने अपने इस्तीफे के फैसले के साथ ही भाजपा और कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह न तो कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही भाजपा में शामिल होने की उनकी कोई योजना है।
उन्होंने कहा कि वह ऐसे राजनीतिक दलों में जाकर उनके नेताओं के समर्थन में नारे नहीं लगा सकते, जिनके नेता कभी उनके दरवाजे पर आकर बैठा करते थे। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उमेश कुमार ने उम्मीद जताई कि भविष्य में जनहित के मुद्दों पर अन्य जनप्रतिनिधि भी आगे आएंगे और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से उठाएंगे।
फिलहाल, उनके इस्तीफे की घोषणा ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की नजर बुधवार को उनके अगले कदम और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की प्रक्रिया पर रहेगी।




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