कांग्रेस नेताओं ने लोकभवन पहुंचने से पहले राजपुर रोड स्थित पार्टी कार्यालय में पत्रकार वार्ता की। इसके बाद नेता अपने-अपने निजी वाहनों से लोकभवन के लिए रवाना हुए। कांग्रेस नेताओं ने पहले से निर्धारित कार्यक्रम के बिना वहां पहुंचकर अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मुख्य गेट पर ही उन्हें रोक दिया। इसके बाद नेताओं ने गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया।
वीवीआईपी की भूमिका की जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिजनों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने मामले में कथित रूप से संलिप्त बताए जा रहे वीवीआईपी को जांच के दायरे में लाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता के माता-पिता कई बार कथित वीवीआईपी के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम ले चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि परिजनों की शिकायत के बावजूद संबंधित मामले में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। कांग्रेस ने यह भी सवाल किया कि कथित रूप से नाम सामने आने के बावजूद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जांच और कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।
पार्टी नेताओं ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में किसी की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उसका आंदोलन जारी रहेगा।
राज्यपाल को ज्ञापन देना चाहती थी कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने बताया कि पार्टी इस मामले में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना चाहती थी। इसके लिए लोकभवन से समय मांगा गया था, लेकिन समय नहीं मिलने के बाद पार्टी नेताओं ने बिना पूर्व सूचना वहां पहुंचने का निर्णय लिया।
प्रदर्शन में पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक प्रीतम सिंह, गरिमा दसौनी और आशा मनोरमा डोबरियाल सहित कई नेता मौजूद रहे। पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति का भी विरोध
कांग्रेस का विरोध दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने से भी जुड़ा है। पार्टी इस नियुक्ति को अंकिता भंडारी मामले में उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में देख रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।




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