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भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र: सियासी घमासान के बीच जन मुद्दे रहे पीछे, आठ घंटे चार मिनट चली कार्यवाही

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र में सियासी माहौल तो गरमाया, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी। चुनावी वर्ष में धामी सरकार के कार्यकाल के अंतिम सत्र से लोगों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की उम्मीद थी। हालांकि, विपक्ष के हंगामे और सत्ता पक्ष के बीच टकराव के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही। दो दिवसीय सत्र निर्धारित समय के बजाय लगभग डेढ़ दिन ही चल पाया।

 

सदन की कुल कार्यवाही आठ घंटे चार मिनट चली। सत्र के पहले दिन दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि देने और शोक संवेदना व्यक्त करने में अधिकतर समय बीत गया। इसके चलते जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा का अवसर नहीं मिल पाया। दूसरे दिन भी सदन में हंगामे के कारण प्रश्नकाल सुचारु रूप से संचालित नहीं हो सका।

विपक्ष की रणनीति को नहीं मिला पूरा मौका

चुनावी वर्ष को देखते हुए विपक्ष ने विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों पर अपनी रणनीति तैयार की थी। भ्रष्टाचार, जनसमस्याओं और सरकार की कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर विपक्ष सरकार से जवाब मांगना चाहता था। हालांकि, सदन में लगातार हुए हंगामे के चलते विपक्ष अपने मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाया।

वहीं, सत्ता पक्ष ने हंगामे के बीच ही विधायी कार्यवाही पूरी की। सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना रहा। ऐसे में जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। सत्र के दौरान जिस तरह राजनीतिक गतिविधियां हावी रहीं, उससे सदन की कार्यवाही और जनहित के मुद्दों को लेकर सवाल भी उठे।

अनुपूरक बजट सहित विधायी कार्य पूरे

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के अनुसार, दो दिवसीय सत्र में अनुपूरक बजट पारित करने के साथ नौ विधेयक और दो अध्यादेश भी पारित किए गए। पहले दिन सदन की कार्यवाही छह घंटे 58 मिनट चली, जबकि दूसरे दिन केवल एक घंटे छह मिनट तक कार्यवाही संचालित हो सकी।

इस तरह दोनों दिनों को मिलाकर सदन कुल आठ घंटे चार मिनट चला। सरकार ने इस अवधि में निर्धारित विधायी कार्यों को पूरा किया, लेकिन विपक्ष और सरकार के बीच टकराव के कारण जनसमस्याओं पर चर्चा सीमित रही।

जनता को थी व्यापक चर्चा की उम्मीद

गैरसैंण में आयोजित इस सत्र को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और यह वर्तमान सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र था। ऐसे में जनता को उम्मीद थी कि सदन में क्षेत्रीय विकास, रोजगार, भ्रष्टाचार और अन्य जनहित के विषयों पर गंभीर चर्चा होगी।

हालांकि, सत्र के दौरान राजनीतिक खींचतान अधिक दिखाई दी। परिणामस्वरूप कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा का अवसर नहीं मिल पाया। अब विधानसभा सत्र के समापन के बाद सरकार और विपक्ष के बीच इस बात को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है कि सदन में जनता की समस्याओं को कितनी प्राथमिकता मिली।

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Hill Mail

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