विश्वविद्यालय की इस पहल से उत्तराखंड की दोनों प्रमुख लोकभाषाओं को रेडियो के माध्यम से प्रोत्साहन मिलेगा। रविवार को प्रसारित हुए प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के साथ ही इसकी शुरुआत कर दी गई है। अब श्रोता अपनी मातृभाषा में इस कार्यक्रम को सुन सकेंगे।
हर रविवार होगा दोनों भाषाओं में प्रसारण
विश्वविद्यालय के रेडियो प्रभारी प्रो. राकेश चंद्र रयाल के अनुसार, कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के निर्देशन में इस पहल का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम के प्रसारण का समय भी निर्धारित कर दिया गया है। प्रत्येक रविवार शाम सात बजे कुमाऊंनी भाषा में और शाम 7:30 बजे गढ़वाली भाषा में ‘मन की बात’ प्रसारित किया जाएगा।
इस व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले श्रोताओं को उनकी स्थानीय भाषा में कार्यक्रम सुनने का अवसर मिलेगा। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह पहल उपयोगी होगी, जो अपनी मातृभाषा में जानकारी और संदेशों को अधिक सहजता से समझते हैं।
अनुवाद और रिकॉर्डिंग के बाद पहुंचेगा संदेश
कार्यक्रम को दोनों लोकभाषाओं में प्रसारित करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल कार्यक्रम का प्रसारण किया जाएगा। इसके बाद कार्यक्रम की स्क्रिप्ट का कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा।
अनुवाद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय के रेडियो उद्घोषक और शिक्षक संबंधित भाषाओं में स्क्रिप्ट की रिकॉर्डिंग करेंगे। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री के विचारों और कार्यक्रम में शामिल विषयों को स्थानीय भाषा में श्रोताओं तक पहुंचाया जाएगा।
लोकभाषाओं और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय का सामुदायिक रेडियो अब ‘हेलो हल्द्वानी’ रेडियो एप के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भी श्रोताओं तक अपनी पहुंच बना रहा है। इससे उत्तराखंड के बाहर रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों को भी अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर मिल सकता है।
रेडियो का उद्देश्य केवल सूचना और मनोरंजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रदेश की लोकभाषाओं, संस्कृति और स्थानीय ज्ञान परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाना भी है।
डिजिटल दौर में स्थानीय भाषाओं को संचार के आधुनिक माध्यमों से जोड़ने की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे नई पीढ़ी को गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाओं से जोड़ने तथा इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।




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