देहरादून के एक निजी अस्पताल में लगी आग, एक महिला की मौत

देहरादून के एक निजी अस्पताल में लगी आग, एक महिला की मौत

देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में अचानक आग लग गई, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया। इस हादसे में आईसीयू में भर्ती 66 वर्षीय वीरवती की दम घुटने से मौत हो गई है तथा 16 लोगों के घायल होने की खबर है। तीन पुलिसकर्मी भी बचाव के दौरान झुलसे हैं।

बुधवार की वो दोपहर देहरादून के हरिद्वार रोड के लिए किसी सामान्य दिन जैसी थी, लेकिन पैनेसिया अस्पताल के भीतर मौत दबे पांव दाखिल हो रही थी। दोपहर का वक्त था, जब अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगे एक एसी (AC) में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते एक जोरदार धमाका हुआ।

ये धमाका सिर्फ एक मशीन का नहीं था, बल्कि उन छह जिंदगियों के लिए खतरे की घंटी थी जो उस वक्त आईसीयू के भीतर वेंटिलेटर पर अपनी सांसों के लिए लड़ रहे थे। धमाके के साथ ही पूरे अस्पताल परिसर में जहरीला धुआं और गैस फैल गई। मरीजों और स्टाफ के बीच हड़कंप मच गया। विजिबिलिटी जीरो थी और सांस लेना दूभर। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। यहां जो मंजर दिखा, वो वीरता की मिसाल था।

पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना उस जहरीले धुएं के बीच छलांग लगा दी। बिना किसी पुख्ता सुरक्षा उपकरण के, पुलिस के जवान आईसीयू की ओर दौड़े ताकि वहां वेंटिलेटर पर पड़े मरीजों को बचाया जा सके। इस बचाव कार्य के दौरान धुएं ने खुद पुलिसकर्मियों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे तीन जवानों की तबीयत बिगड़ने लगी।

रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चला। छह मरीजों को तुरंत बाहर निकालकर नजदीकी कैलाश अस्पताल शिफ्ट किया गया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आईसीयू में पहले से वेंटिलेटर पर भर्ती एक बुजुर्ग महिला, बीरावती जी ने इस हादसे के दौरान दम तोड़ दिया।

धुएं और गैस के उस गुबार ने उनकी कमजोर पड़ती सांसों को हमेशा के लिए थाम दिया। इस हादसे में कुल दस लोग घायल हुए, जिनमें अस्पताल का स्टाफ और वो जांबाज पुलिसकर्मी भी शामिल हैं जो दूसरों की जान बचाते-बचाते खुद अस्पताल के बिस्तर पर पहुंच गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून प्रमोद डोबाल और एसपी सिटी तुरंत मौके पर पहुंचे।

एसएसपी ने खुद घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और राहत कार्यों का जायजा लिया। दमकल कर्मियों की भारी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया गया। इसके बाद एसएसपी प्रमोद डोबाल कैलाश अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने भर्ती पुलिसकर्मियों और अन्य मरीजों का हालचाल जाना। डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए कि इलाज में कोई कोताही न बरती जाए।

फिलहाल, प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और बाकी घायलों की हालत स्थिर बनी हुई है। पैनेसिया अस्पताल का ये हादसा एक बड़ा सबक है। एसी में शॉर्ट सर्किट और फिर ब्लास्ट होना ये बताता है कि अस्पतालों में मशीनों के रखरखाव में कितनी बड़ी जोखिम छिपी हो सकती है।

आज एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है। जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सवाल वही है—क्या हम अगले हादसे का इंतजार करेंगे या सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करेंगे? पैनेसिया अस्पताल की ये झुलसी हुई दीवारें चीख-चीख कर सुरक्षा और सतर्कता की मांग कर रही हैं। ‘सावधान रहिए, क्योंकि लापरवाही की कीमत अक्सर जान देकर चुकानी पड़ती है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार अस्पताल में आग लगने की घटना शॉर्ट सर्किट के कारण हुई प्रतीत हो रही है। घटना के समय अस्पताल में कुल 14 मरीज भर्ती थे। राहत एवं बचाव कार्य के दौरान अस्पताल में फंसे सभी सात व्यक्तियों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर निकटवर्ती अस्पतालों में उपचार हेतु स्थानांतरित किया गया।

प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार घटना में वीरवती (66 वर्ष) नामक महिला की दम घुटने के कारण मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त कुल 16 व्यक्ति घायल हुए हैं, जिनमें अस्पताल में भर्ती मरीज, उनके परिजन तथा राहत एवं बचाव अभियान में शामिल पुलिस एवं फायर सर्विस कर्मी सम्मिलित हैं। सभी घायलों का उपचार विभिन्न चिकित्सालयों में जारी है।

राहत अभियान के दौरान फायर सर्विस एवं पुलिस विभाग के तीन कर्मी भी घायल हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी घायलों की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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