बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों से मचा हड़कंप, बीकेटीसी ने गठित की चार सदस्यीय जांच समिति

बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों से मचा हड़कंप, बीकेटीसी ने गठित की चार सदस्यीय जांच समिति

विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप सामने आने के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच के लिए अलग से आंतरिक टीम भी बनाई गई है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि चढ़ावे में किसी भी प्रकार की अनियमितता या चोरी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस कर्मचारी को उनका निजी सचिव बताया जा रहा है, वह उनका व्यक्तिगत सचिव नहीं बल्कि मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है, जो पूर्व में भी कई अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में कार्य कर चुका है।

मामला तब सामने आया जब धार्मिक संगठन भैरव सेना ने बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ को ज्ञापन सौंपकर मंदिर के चढ़ावे में आर्थिक हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए। संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री का आरोप है कि 2 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज में एक कर्मचारी संदिग्ध गतिविधियों में दिखाई दे रहा है। शिकायत मिलने के बाद बीकेटीसी प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी सहित ड्यूटी पर तैनात चार कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार से बचने की अपील की। रांगड़ ने बताया कि पिछले 40 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रख ली गई है और हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज को जूम करने पर तस्वीर स्पष्ट नहीं दिख रही है, जिससे संदिग्ध व्यक्ति की पहचान में कठिनाई आ रही है। बताया जा रहा है कि मंदिर समिति के भीतर से ही किसी व्यक्ति ने दान गिनती में कथित गड़बड़ी की सूचना भैरव सेना तक पहुंचाई थी, जिसके बाद संगठन ने तत्काल बीकेटीसी प्रशासन को शिकायत भेजी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बदरीनाथ धाम की व्यवस्थाओं और बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीते कुछ वर्षों में समिति कई विवादों को लेकर चर्चा में रही है। इनमें गर्भगृह की दीवारों पर चढ़ाई गई सोने की प्लेटों का रंग उतरना, मंदिर परिसर में क्यूआर कोड से दान व्यवस्था, वीआईपी मेहमाननवाजी पर बजट खर्च, एक पदाधिकारी द्वारा अपनी पत्नी की नियुक्ति तथा वीआईपी दर्शन व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर मंदिर समिति की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।

बदरीश पंडा पंचायत के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी ने बीकेटीसी अध्यक्ष को पत्र भेजकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि पैसे लेकर विशेष दर्शन कराने जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं बदरीश संयुक्त संघर्ष समिति के प्रवक्ता मंदीप भंडारी ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में लीपापोती की गई तो संगठन आंदोलन करेगा। उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल और महासचिव डॉ. बृजेश सती ने भी जांच रिपोर्ट शीघ्र सार्वजनिक करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

बीकेटीसी के अनुसार बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गिनती पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होती है। मंदिर में कुल पांच दानपात्र हैं, जिनमें से दो गर्भगृह और तीन बाहर स्थापित हैं। दानपात्र भरने पर उन्हें मंदिर के पीछे स्थित विशेष कक्ष में ले जाकर पांच कर्मचारियों की टीम, पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी तथा सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के बीच खोला जाता है। नकद राशि की गिनती पूरी होते ही उसी दिन बैंक कर्मचारियों को सौंपकर समिति के खाते में जमा करा दी जाती है। सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का मूल्यांकन कर उनका अलग रिकॉर्ड रखा जाता है।

बीकेटीसी के अधीन 45 से अधिक मंदिर हैं, जहां से प्रतिवर्ष औसतन 80 से 85 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। यह राशि राज्य के कई विभागों के वार्षिक बजट से भी अधिक है। ऐसे में बदरीनाथ धाम जैसे विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल में चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप न केवल मंदिर समिति की कार्यप्रणाली बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से भी जुड़े हैं। अब सभी की निगाहें बीकेटीसी की जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।

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