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नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी की तरफ बढ़े उत्तराखंड

अपने संबोधन के दौरान एनटीआरओ के पूर्व चीफ आलोक जोशी।

आलोक जोशी, पूर्व प्रमुख एनटीआरओ एवं रॉ

40 साल सर्विस करने के बाद जब कोई आपको इस तरीके से प्रोत्साहित करता है जैसा मुझे रैबार में किया गया, तो सुखद अहसास होता है। सही बात तो यह है कि मैं उत्तराखंड से इमोशनली जुड़ा हुआ हूं लेकिन मेरी पैदाइश और रहन-सहन उत्तर प्रदेश का है। लेकिन जब मुख्यमंत्री जी ने मुझे पहले रैबार में आमंत्रित किया और मैं उसमें शरीक हुआ तो इनके जज्बात से प्रेरित होकर मंच से ही मुझे एक उत्साह सा हुआ। उसी समय एक प्रोजेक्ट मेरे दिमाग में चला कि मैं क्या कर सकता हूं उत्तराखंड के लिए अपने रिटायर होने से पहले, जो मैं अगले 12 महीनों में होने वाला था।

मुझे एक ही बात का ध्यान था कि उत्तराखंड में आजीविका के पारंपरिक स्रोतों से हटकर कुछ करना है। इसी संदर्भ में मैंने मुख्यमंत्री जी से गुजारिश की कि हमारा जो प्रोजेक्ट है ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर बनाने का, उसके लिए आप सहयोग दें। तुरंत उन्होंने मन से ही इसके लिए स्वीकृति दी। आज मैं गर्व के साथ कहना चाहूंगा कि सीएम और उनकी शानदार टीम खासतौर से अमित सिन्हा के सहयोग से 6 महीने के भीतर ही सपना पूरा हो गया।

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कई राज्यों से हमारा सहयोग रहा लेकिन उत्तराखंड से जो सहयोग मिला, वह स्मरणीय है। मैं सिर्फ एक बात कहना चाहूंगा कि नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी की तरफ हमें अग्रसर होना चाहिए क्योंकि आने वाले दिनों में आप चाहें हॉर्टिकल्चर हो या टूरिज्म का क्षेत्र हो, अगर नई-नई तकनीक को आप स्वीकार नहीं करेंगे तो पीछे रह जाएंगे, भले ही आपका कितना भी निवेश रहा हो।

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अभी मुख्यमंत्री जी ने डेटा कलेक्शन की बात की, मैं उनसे एक आग्रह जरूर करना चाहूंगा कि डेटा सेंटर बनाने का आपको एक प्रोजेक्ट रखना चाहिए जिसमें सारे डेटा सभी जिले और विभागों के एक प्लेटफॉर्म पर ही उपलब्ध हों। डेटा ऐनालिटिक्स में इस समय जरूरत है कि विशेषज्ञ उत्तराखंड से निकले। एक तरह से आप जो सपना देख रहे हैं कि सही लाभार्थी को लाभ मिले और टॉरगेटेड रूप से मिले तो यह डेटा ऐनालिटिक्स आपको उस दिशा में ले जाएगा। आने वाले दिनों में न केवल सरकारी बल्कि प्राइवेट सेक्टर में भी बहुत मांग होगी। अगर कुमांयू या गढ़वाल यूनिवर्सिटी में इसका स्पेशलाइजेशन हो तो यहां से जो लोग निकलेंगे उन्हें बाहर नौकरी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

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साथ ही साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आपने इतना बढ़िया ड्रोन सेंटर बनाया है, आज दूसरे राज्य उसे रोल मॉडल की तरह देखते हैं। अब जरूरत इस बात की है कि सरकार को उसमें इन्वेस्ट करना होगा। अपने विभागों को आपको प्रोत्साहित करना होगा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल करें। इमेजरी ऐनालिसिस में अगर विशेषज्ञता हासिल होती है तो सेना समेत कई क्षेत्रों में उनके लिए राह खुल जाती है।

मुख्यमंत्री जी ने फिर से मुझे यह मंच दिया। मैं बहुत-बहुत आभारी हूं। जय हिंद।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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