मेजर बॉब खाथिंग एक महान सैन्य नेता और प्रशासक के रूप में पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा राष्ट्रीय एकीकरण के प्रयासों से गहराई से जुड़े रहे। उनके योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व की स्मृति में इस व्याख्यान का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। इस वर्ष कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, मीडिया प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत एस. पेंढारकर, महानिदेशक सैन्य संचालन (DGMO) रहे। उन्होंने मुख्य वक्तव्य देते हुए मेजर बॉब खाथिंग के जीवन और कार्यों को नेतृत्व की महत्वपूर्ण मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में नेतृत्व के लिए सुरक्षा संबंधी दृष्टिकोण के साथ समाज की समझ भी आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों के बीच विश्वास कायम करने से राष्ट्रीय एकीकरण और मजबूत होता है।
असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने अपने उद्घाटन संबोधन में कार्यक्रम की विषयवस्तु की पृष्ठभूमि रखी। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण अभियानों से समाज में पैदा होने वाली अस्थिरता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से ऐसे अभियानों के प्रति अधिक सतर्क और जागरूक रहने का आह्वान किया।
USI के महानिदेशक वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह (सेवानिवृत्त) ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मेजर बॉब खाथिंग की समृद्ध विरासत और पूर्वोत्तर भारत के लिए उनके योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस वर्ष मेमोरियल लेक्चर का विषय था—“पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों के खिलाफ झूठे आख्यान फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का हथियारीकरण और इसका मुकाबला करने के लिए सुझाए गए प्रयास।” इस विषय पर प्रख्यात पत्रकार, लेखक और पूर्वोत्तर मामलों के विशेषज्ञ सुबीर भौमिक ने व्याख्यान दिया।
सुबीर भौमिक ने पूर्वोत्तर के बदलते सूचना परिवेश और सोशल मीडिया के माध्यम से सुरक्षा बलों के खिलाफ गलत सूचनाओं एवं प्रचार के प्रसार पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए चलाए जाने वाले संगठित नैरेटिव अभियानों से जनता की धारणा प्रभावित हो सकती है, अविश्वास बढ़ सकता है और सुरक्षा बलों की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
व्याख्यान में गलत सूचना, दुष्प्रचार और समन्वित सोशल मीडिया अभियानों से उत्पन्न चुनौतियों के साथ-साथ उनसे निपटने के लिए व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा हुई। इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने वक्ता के साथ विषय के विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया।
कार्यक्रम का समापन असम राइफल्स (ईस्ट) के इंस्पेक्टर जनरल मेजर जनरल आई.एस. भिंडर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। वार्षिक मेजर बॉब खाथिंग मेमोरियल लेक्चर पूर्वोत्तर, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श का प्रभावी मंच बना हुआ है।




Leave a comment