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उत्तराखंड अपनी निराली संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां के लोक जीवन के कई रंग और कई उत्सव हैं। ऐसा ही एक पारंपरिक उत्सव है ‘घी संक्रांति’। उत्तराखंड में घी संक्रान्ति पर्व को घ्यू संग्यान, घिया संग्यान और ओलगिया के नाम से भी जाना जाता है।
READ MOREमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परेड ग्राउंड देहरादून में राज्य के मुख्य कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया एवं फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
READ MOREएक तरफ जब देश प्रदेश में तिरंगा फहराया गया तो वहीं दूसरी तरफ देहरादून में एक बेटे का शरीर तिरंगे में लिपट कर आया। स्वतंत्रता दिवस के दिन देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर कैप्टन दीपक सिंह का पार्थिव शरीर लाया गया।
READ MOREदेहरादून में स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने देश के विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों को नमन करते हुए विभाजन की विभीषिका का दर्द सहने वाले तमाम सेनानियों के परिजनों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
READ MOREस्वच्छता और पर्यावरण का गहरा संबंध है। पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए हमें स्वच्छता को प्राथमिकता में रखना होगा। स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए हमें तकनीकी का भी सहारा लेना होगा।
READ MOREमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार रोड स्थित संस्कृति प्रेक्षागृह में प्रसिद्धि लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी के जन्मदिन पर गीत यात्रा के 50 वर्ष कार्यक्रम में उनकी रचनाओं पर ललित मोहन रयाल द्वारा लिखित पुस्तक कल फिर जब सुबह होगी का विमोचन किया।
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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में बंजी जंपिंग करने के कुछ ही समय बाद देहरादून के एक 21 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट अथवा सिंकोप अटैक (अचानक बेहोशी और हृदय संबंधी समस्या) की आशंका जताई है। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
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उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स ऋषिकेश में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अब संस्थान की क्षमता पर भारी पड़ने लगी है। रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता एक हजार है। बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्षों से लंबित 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विस्तार योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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