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केदारघाटी में इस बार भी भारी बारिश और बादल फटने की घटना के कारण बहुत नुकसान हुआ है। साल 2013 की आपदा के बाद शासन स्तर पर केदारनाथ में डॉप्लर रेडार लगाने की बात कही गई थी। जिससे मौसम का सटीक पूर्वानुमान मिल सके और इस तरह की मुश्किलों से निपटने के लिए पहले से इंतजाम किए जा सकें। पर इतने साल गुजरने के बाद भी केदारनाथ में डॉप्लर रेडार नहीं लगाया गया है।
READ MOREबैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने की सीएम पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में मुलाकात की। इस अवसर पर लक्ष्य सेन की माताजी निर्मला सेन एवं पिताजी के.डी सेन तथा उत्तराखंड बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव बी.एस मनकोटी उपस्थित थे।
READ MOREदेहरादून में आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक हुई जिसमें कई निर्णय लिये गये।
READ MOREमोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन नई दिल्ली ने 15 अगस्त 2024 को देहरादून नेशनल एकेडमी ऑफ डिफेंस (डी.एन.ए.) के छिद्दर वाला कैम्पस जिला हरिद्वार उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के विषय पर ड्रांइग प्रतियोगिता का आयोजन किया।
READ MOREआईटीबीपी के पूर्व एडीजी मनोज सिंह रावत को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। अपर सचिव कर्मेन्द्र सिंह ने राज्यपाल के निर्देश पर मनोज सिंह रावत को सदस्य नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।
READ MOREउत्तराखंड साल 2000 में 13 जिलों के साथ अस्तित्व में आया था। 15 अगस्त, 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने चार नए जिलों के निर्माण की घोषणा की। इनमें उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री, पौड़ी में कोटद्वार, अल्मोड़ा में रानीखेत और पिथौरागढ़ में डीडीहाट को नया जिला घोषित किया गया। लेकिन सीएम पद से हटते ही ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में बंजी जंपिंग करने के कुछ ही समय बाद देहरादून के एक 21 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट अथवा सिंकोप अटैक (अचानक बेहोशी और हृदय संबंधी समस्या) की आशंका जताई है। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
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उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स ऋषिकेश में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या अब संस्थान की क्षमता पर भारी पड़ने लगी है। रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल बेड क्षमता एक हजार है। बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में पिछले आठ वर्षों से लंबित 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विस्तार योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों और अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि जल्द विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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