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पंडित नैन सिंह रावत केवल एक सर्वेक्षक नहीं थे। वे देवभूमि उत्तराखंड के वैज्ञानिक योद्धा, अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रतिमूर्ति थे। आज, जब हम तकनीक के सहारे दुनिया को नापते हैं, तब उनका जीवन यह याद दिलाता है कि संकल्प, साहस और बुद्धि से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
READ MOREउत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तराखंड सरकार की पहल रंग लाती दिख रही है। प्रदेश में पर्यटकों की संख्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वर्ष 2025 में उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों/तीर्थयात्रियों की संख्या 6 करोड़ 3 लाख से अधिक पहुंच गई है, जो राज्य गठन के बाद अब तक की सर्वाधिक संख्या है।
READ MOREकक्षा दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के नज़दीक आते ही, पूरा देश मानो परीक्षा-बुखार की चपेट में आ जाता है। वर्षों से फरवरी और मार्च भय, चिंता और भावनात्मक तनाव के चरम महीने बन गए हैं। यह तनाव केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों और पूरे समाज को अपनी गिरफ्त में ले लेता है।
READ MOREबसंत पंचमी के पावन अवसर पर उत्तराखंड क्षत्रिय कल्याण समिति की 16 सदस्यीय नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। समिति का विधिवत गठन दिगम्बर सिंह नेगी के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
READ MOREउत्तराखंड में बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और मानवीय भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ उत्सव है। यह पर्व शीत ऋतु के समापन और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। जैसे ही पहाड़ों में जमी बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगती है और खेत-खलिहानों में नई हरियाली की आहट सुनाई देती है, वैसे ही लोगों के मन में भी नई ऊर्जा और उल्लास का संचार होने लगता है।
READ MOREउत्तराखंड राज्य में पहली बार आयोजित की जा रही हाई-एल्टीट्यूड “नीति वैली एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” (मई के अंत में प्रस्तावित) की तैयारियाँ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में आज पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्बयाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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कपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
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