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आज दिल्ली में रैबार–7 कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रैबार शब्द के शाब्दिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि गढ़वाल एवं कुमाऊँ क्षेत्र में रैबार एक प्राचीन, परंपरागत और अत्यंत विश्वसनीय संचार माध्यम रहा है। उन्होंने गढ़वाली बोली के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया।
READ MOREबदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति की सोच और साहस से होती है। उम्र या परिस्थितियां कभी भी सपनों के रास्ते में दीवार नहीं बन सकतीं। उनकी कहानी उत्तराखंड के युवाओं को यह समझाती है कि केवल नौकरी ही जीवन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि कृषि, उद्यमिता और नवाचार भी सम्मानजनक और स्थायी विकल्प हो सकते हैं।
READ MOREमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन एवं माननीय पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में नंदा देवी राजजात यात्रा–2026 की तैयारियों की समीक्षा हेतु आज एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड कार्यालय, देहरादून में संपन्न हुई।
READ MOREनरेंद्र सिंह नेगी केवल लोकगायक नहीं, उत्तराखंड की आत्मा की आवाज़ हैं। उनके गीत पहाड़ के संघर्ष, पलायन, पर्यावरण और सामाजिक सच्चाइयों को ईमानदारी से सामने रखते हैं। बिना शोर और दिखावे के, उनकी गायकी हर पीढ़ी को जोड़ती है और लोक को वर्तमान में जीवित रखती है।
READ MOREउत्तराखंड की नदियाँ अवैध खनन के कारण भीतर से खोखली होती जा रही हैं। नदी तल से छेड़छाड़ ने बाढ़, भूस्खलन और गाँवों की असुरक्षा को बढ़ा दिया है। केदारनाथ से जोशीमठ तक की आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश भविष्य को संकट में डाल रहा है।
READ MOREउत्तराखंड के सरकारी शिक्षक केवल शिक्षक नहीं रहा। वह चुनाव कर्मी है, जनगणना अधिकारी है, स्वास्थ्य कार्यकर्ता है, पोषण मिशन का सुपरवाइज़र है और डिजिटल डेटा एंट्री ऑपरेटर भी है। सप्ताह का शायद ही कोई दिन ऐसा होता है जब वह पूरी निष्ठा से केवल पढ़ाने का काम कर पाए। विडंबना यह है कि जब बच्चों का सीखने का स्तर गिरता है या नामांकन घटता है, तो सबसे पहले सवाल उसी शिक्षक पर उठते हैं।
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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कपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
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