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बीरोंखाल में एक कार ऊपर की सडक से अनियंत्रित होकर नीचे की सडक पर जा गिरी। इस वाहन में कुल आठ लोग सवार थे। जिसमें से एक बच्चे की मौत हो गयी। वहीं छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
READ MOREगंगोत्री धाम से केदारनाथ की यात्रा पर जा रहा एक यात्री वाहन गौरीकुंड हाईवे पर काकड़ागाड़ के समीप पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आ गया। जब तक चालक कुछ समझ पाता एक के बाद एक गिरे भारी पत्थरों से वाहन का आगे का हिस्सा और छत क्षतिग्रस्त हो गई।
READ MOREउत्तराखंड में 2015 बैच की आईपीएस अधिकारी रचिता जुयाल अपने इस्तीफा को लेकर चर्चाओं में हैं। खबर है कि रचिता जुयाल ने कुछ दिन पहले ही इस्तीफे से जुड़ा आवेदन मुख्य सचिव कार्यालय को भेजा था।
READ MOREदेहरादून। सदस्य, राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग ने आगामी मानसून में उत्तराखंड के लिए सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वनुमान लगाया है। ऐसे में उत्तराखंड के लिए 15 जून से सितंबर तक आपदा की नजर से महत्वपूर्ण समय है। उत्तराखंड राज्य बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन, भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।
READ MOREचारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर टिकटों की कालाबाजारी के मामले आते रहते हैं और यात्रीगण इनकी शिकायत पुलिस को करते हैं। रूद्रप्रयाग पुलिस को भी टिकटों की कालाबाजारी करने की जानकारी मिली तो पुलिस ने कार्रवाही करते हुए गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
READ MORE30 मई 2025, को हम गढ़वाल के अमर सपूत, स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और उत्तराखंड के प्रथम खाद्य मंत्री जगमोहन सिंह नेगी की 57वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह दिन न केवल उनके बलिदान और समर्पण को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि उस युग को भी याद करने का क्षण है, जिसे ‘जगमोहन युग’ के रूप में जाना जाता है। वह युग, जब पहाड़ की दुर्गम वादियों में एक नायक ने अपने अटूट संकल्प और सेवा भाव से लाखों लोगों के जीवन को नई रोशनी दी।
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक और संस्कृतिकर्मी दीवान कनवाल के निधन से पूरे कुमाऊं क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। लोकगीत रसिकों को अपनी मधुर आवाज से दीवाना बनाने वाले इस कलाकार के जाने से सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। अल्मोड़ा सहित आसपास के कस्बों और शहरों में उनके प्रशंसकों, कलाकारों और आम लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंता का विषय बनता जा रहा है। जंगलों का क्षेत्र घटने और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण जंगली जानवर अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं।
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