सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में इस बार हिमालयी राज्यों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल हिमालयी राज्यों में पहला स्थान हासिल किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी शीर्ष राज्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं उत्तराखंड का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा और राज्य हिमालयी राज्यों की सूची में आठवें स्थान पर पहुंच गया। राष्ट्रीय रैंकिंग में भी उत्तराखंड को 25वां स्थान मिला है।
सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मिजोरम ने 94.94 प्रतिशत पास प्रतिशत के साथ देशभर में छठी रैंक हासिल की। शिक्षा के क्षेत्र में यह उपलब्धि मिजोरम की मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की मेहनत को दर्शाती है। वहीं जम्मू-कश्मीर ने 92.47 प्रतिशत परिणाम के साथ हिमालयी राज्यों में दूसरा और राष्ट्रीय स्तर पर दसवां स्थान प्राप्त किया।
मेघालय ने 91.90 प्रतिशत पास प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि सिक्किम 91.25 प्रतिशत अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। हिमाचल प्रदेश ने 89.60 प्रतिशत परिणाम के साथ पांचवीं रैंक प्राप्त की। नागालैंड 86.55 प्रतिशत के साथ छठे और असम 85.66 प्रतिशत परिणाम के साथ सातवें स्थान पर रहा। उत्तराखंड का कुल पास प्रतिशत 85.48 दर्ज किया गया, जिसके चलते राज्य को हिमालयी राज्यों में आठवां स्थान मिला। यह स्थिति इसलिए भी चिंता का विषय मानी जा रही है क्योंकि उत्तराखंड इस सूची में असम से भी पीछे रह गया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में भौगोलिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद कई राज्यों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ऐसे में उत्तराखंड के लिए यह परिणाम शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा तैयारी की गुणवत्ता पर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य को सरकारी और निजी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए नए प्रयास करने होंगे।
हालांकि, इस बीच उत्तराखंड के कुछ संस्थानों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। हरिद्वार स्थित गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। विद्यालय के कला वर्ग के छात्र रक्षक सैनी ने 96.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संस्थान में टॉप किया। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय में खुशी का माहौल है।
इसके अलावा जवाहर नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालयों ने भी बेहतरीन परिणाम देकर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। उत्तराखंड में नवोदय विद्यालयों का पास प्रतिशत 99.9 रहा, जबकि केंद्रीय विद्यालयों ने 99 प्रतिशत सफलता दर हासिल की। इन विद्यालयों के अनुशासित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर प्रबंधन को उनकी सफलता का मुख्य कारण माना जा रहा है।
देहरादून रीजन के औसत प्रदर्शन में इस बार गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों के उत्कृष्ट परिणामों ने शिक्षा व्यवस्था के सकारात्मक पक्ष को भी सामने रखा है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि प्रदेश के अन्य विद्यालय भी इन संस्थानों की शिक्षण पद्धति और अनुशासन को अपनाएं तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड फिर से बेहतर रैंक हासिल कर सकता है।
सीबीएसई के इस वर्ष के परिणामों ने एक ओर मिजोरम जैसे राज्यों की शैक्षणिक प्रगति को उजागर किया है, वहीं उत्तराखंड के लिए यह आत्ममंथन का अवसर भी बन गया है। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं।







