उत्तराखंड में राज्य की आर्थिक स्थिति को गहराई से समझने के लिए राष्ट्रीय स्तर का घरेलू आय सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। यह व्यापक सर्वेक्षण मार्च 2027 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में संचालित किया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत सांख्यिकीय विभाग की टीमें घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार से विस्तृत जानकारी एकत्र करेंगी। सर्वे में परिवारों की आय के सभी प्रमुख स्रोतों जैसे वेतन, कृषि, स्वरोजगार, व्यवसाय, मजदूरी और अन्य आय का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, उत्तराखंड में पहली बार इस स्तर पर घरेलू आय का इतना व्यापक और संगठित सर्वेक्षण किया जा रहा है। इससे राज्य में आय के वास्तविक स्वरूप, आय असमानता और आर्थिक गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
यह सर्वे सरकार के लिए नीति निर्माण में बेहद उपयोगी साबित होगा। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाया जा सकेगा, जिससे जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सके।
सर्वेक्षण के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया गया है, जिन्हें डेटा संग्रह की निर्धारित प्रक्रिया और तकनीकी मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। ये कर्मी डिजिटल और मैनुअल दोनों माध्यमों से जानकारी एकत्र करेंगे, ताकि डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के दौरान नागरिकों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए ही किया जाएगा, और किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
इस सर्वे में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिससे पूरे प्रदेश की आर्थिक स्थिति का संतुलित और व्यापक विश्लेषण संभव हो सके। सरकार का मानना है कि यह पहल ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सर्वेक्षण टीमों का सहयोग करें और सही व पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि राज्य के विकास के लिए सटीक और विश्वसनीय डेटा तैयार किया जा सके।
यह सर्वे न केवल वर्तमान आर्थिक स्थिति का आकलन करेगा, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करेगा, जिससे उत्तराखंड की प्रगति को नई दिशा मिल सके।







