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उत्तराखंड न्यूज़चमोलीरुद्रप्रयागसरोकार

मौसम की मार से थमी चारधाम यात्रा: केदारनाथ में चार घंटे रोकना पड़ा सफर, कई जिलों में बर्फबारी और बारिश से जनजीवन प्रभावित

प्रदेश में मौसम के अचानक बिगड़े मिजाज ने रविवार को चारधाम यात्रा समेत आम जनजीवन पर व्यापक असर डाला। मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन केदारनाथ यात्रा को चार घंटे के लिए रोक दिया। वहीं बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर पत्थर और मलबा गिरने से यातायात बाधित रहा। पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से लोगों को गर्मियों में भी सर्दियों जैसा एहसास हुआ।

रुद्रप्रयाग जिले में रविवार सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक केदारनाथ यात्रा स्थगित रखी गई। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अगस्त्यमुनि, कुंड, सोनप्रयाग और गौरीकुंड में करीब 200 से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर रोका। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट और लगातार खराब मौसम को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया था। दोपहर बाद मौसम में सुधार होने और बारिश थमने पर यात्रियों को आगे रवाना किया गया।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सोनप्रयाग, गौरीकुंड और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौसम सामान्य होने तक किसी भी यात्री को जोखिम वाले क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रा मार्गों की निगरानी कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार की जा रही है।

उधर, बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी मौसम का असर साफ दिखाई दिया। कई स्थानों पर पहाड़ियों से पत्थर और बोल्डर गिरने के कारण यातायात बाधित रहा। श्रीनगर क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर करीब 400 वाहनों को एनआईटी मैदान में रोका गया। लगभग तीन घंटे बाद मार्ग सुरक्षित घोषित होने पर वाहनों को आगे जाने की अनुमति दी गई।

कुमाऊं मंडल में भी बारिश और बर्फबारी ने मुश्किलें बढ़ा दीं। चंपावत जिले के रीठासाहिब क्षेत्र में लधिया और रतिया नदियों में अचानक आए उफान से जोड़ मेले में शामिल श्रद्धालु फंस गए। नदी पर बना पैदल पुल भी बह गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे और 70 से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान राहत एवं बचाव अभियान कई घंटों तक चलता रहा।

चंपावत जिले में ही टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर अमोड़ी के पास भारी मलबा आने से यातायात करीब तीन घंटे तक बंद रहा। वहीं पूर्णागिरि मार्ग पर बाटनागाड़ के उफान पर आने से दो घंटे तक आवाजाही ठप रही। मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई श्रद्धालु रास्ते में फंस गए।

मौसम की इस मार के बीच बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। चंपावत जिले के गड़कोट क्षेत्र के सेला डाबरी गांव में आकाशीय बिजली गिरने से एक गोशाला में आग लग गई। आग की चपेट में आने से एक मवेशी की मौत हो गई, जबकि गोशाला को भी नुकसान पहुंचा।

पिथौरागढ़, बागेश्वर और आसपास के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रविवार को ताजा हिमपात दर्ज किया गया। पंचाचूली, राजरंभा, हंसलिंग, नाग्निधुरा और छिपलाकेदार की चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। बागेश्वर जिले में पिंडारी, सुंदरढूंगा और शंभू ग्लेशियर के आसपास भी बर्फबारी की सूचना मिली।

मौसम विभाग ने सोमवार को भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश, तेज गर्जना और आंधी-तूफान की संभावना जताई है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 3800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अनुमान है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों और यात्रियों से मौसम को देखते हुए सतर्क रहने तथा यात्रा से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लेने की अपील की है।

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