भारत के रक्षा क्षेत्र में सर्वोच्च सैन्य पदों में से एक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पर आसीन जनरल अनिल चौहान उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के खिर्सू ब्लॉक स्थित गवाणा गांव से संबंध रखते हैं।
चारधाम यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही शेष बचे हैं। चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
एनडीएमए ने अमरनाथ यात्रा की तर्ज पर चारधाम यात्रा में यात्रियों की निगरानी के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) तकनीक लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस व्यवस्था से प्रशासन को यात्रियों की वास्तविक समय (रियल-टाइम) लोकेशन और संख्या की जानकारी मिल सकेगी।
वर्तमान में चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण, ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड की व्यवस्था लागू है। इसके अलावा यात्रा मार्गों पर एनपीआर कैमरों के माध्यम से वाहनों की निगरानी की जाती है। अब आरएफआईडी तकनीक के उपयोग से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
एनडीएमए के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों के लिए मेडिकल प्रमाणपत्र अनिवार्य करने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता जताई गई है।
यात्रा मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विश्लेषण कर भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने का भी सुझाव दिया गया है। इससे संवेदनशील स्थानों पर भीड़ का पूर्वानुमान लगाकर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
एनडीएमए का कहना है कि ये सभी व्यवस्थाएं यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगी।
राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने इन सुझावों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है।
वहीं, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
नई तकनीकों के माध्यम से चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।







