मुख्यमंत्री धामी ने बच्चों से बातचीत के दौरान उनके परिवार के सदस्यों का हालचाल पूछा और दीपावली की तैयारियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि परिवार और समाज को आपस में जोड़ने तथा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं। धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज जैसे पर्व हमें आपसी प्रेम, सहयोग और पारिवारिक संबंधों का महत्व समझाते हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से दीपावली पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने और घर की साफ-सफाई में परिवार के सदस्यों का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन की आदत बनाना जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति का छोटा प्रयास प्रदेश और देश को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बच्चों से दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने और स्थानीय कुम्हारों एवं कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे स्थानीय कारीगरों की आजीविका मजबूत होगी और उनके परिवारों को भी आर्थिक सहयोग मिलेगा।
त्योहारों के दौरान सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने बच्चों को पटाखों से दूर रहने और दीये एवं फुलझड़ियां जलाते समय बड़ों की देखरेख में रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि त्योहारों की खुशियां तभी सार्थक हैं, जब हम स्वयं सुरक्षित रहें और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और नई चीजें सीखने में भी रुचि रखनी चाहिए। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम को भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के माध्यम से और अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। इससे बच्चों के साथ संवाद को बेहतर बनाने और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि इससे पहले ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों ने निबंध के माध्यम से उत्तराखंड के विकास को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में उपयोगी विचारों पर विचार किया जाएगा।
अंत में मुख्यमंत्री ने बच्चों को ‘विकल्प रहित संकल्प’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से चुनौतियों से घबराए बिना निरंतर प्रयास करने और अपनी प्रतिभा से माता-पिता, प्रदेश तथा देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।




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