उत्तराखंड के सरकारी बेसिक और जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे हैं। वर्ष 2025-26 की स्वास्थ्य परीक्षण जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि करीब दस प्रतिशत छात्र किसी न किसी बीमारी की चपेट में हैं। इनमें दांत, त्वचा और आंखों से संबंधित बीमारियों से पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। यह रिपोर्ट सचिवालय में आयोजित पीएम पोषण योजना की राज्य स्तरीय क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में प्रस्तुत की गई।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से खून की कमी यानी एनीमिया से पीड़ित बच्चों के उपचार और नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने को कहा। मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य सीधे उनकी पढ़ाई और मानसिक विकास से जुड़ा हुआ है, इसलिए स्कूल स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाया जाना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 15,986 बच्चे दांतों से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित पाए गए हैं। वहीं 11,089 बच्चों में त्वचा संबंधी रोग पाए गए। आंखों की बीमारी से 8,346 छात्र प्रभावित हैं, जबकि 2,708 बच्चों में कान संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। इसके अलावा 950 छात्र गंभीर एनीमिया से पीड़ित पाए गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के मामले भी सामने आए हैं, जिसने शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्कूलों की जिला और ब्लॉकवार समीक्षा की जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन क्षेत्रों में कौन-सी बीमारियां ज्यादा फैल रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष क्षेत्र में किसी बीमारी का प्रभाव अधिक है, तो वहां विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाकर बच्चों का उपचार किया जाए। इसके साथ ही स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में बच्चों की डिजिटल मैपिंग और ट्रैकिंग सिस्टम तैयार करने का निर्णय भी लिया गया। इसके तहत प्रत्येक छात्र के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जाएगा ताकि समय-समय पर उनकी स्थिति की निगरानी की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे बच्चों में बीमारी की पहचान जल्दी हो सकेगी और समय रहते उपचार संभव होगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्कूलों का सोशल ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में स्वास्थ्य सुविधाओं या पोषण व्यवस्था में कमियां हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाए। पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की भी बात कही गई ताकि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिल सके और बीमारियों से बचाव हो।
शिक्षा निदेशक एवं समग्र शिक्षा अभियान के अपर परियोजना निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि लाखों छात्रों के स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर उनकी सुरक्षा और सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में बीमार बच्चों की संख्या में कमी आई है, जो सकारात्मक संकेत है। हालांकि अभी भी कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बैठक में शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित वार्षिक कार्ययोजना और बजट का भी विवरण प्रस्तुत किया। इसमें स्कूलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, नियमित जांच अभियान चलाने और पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में दांत और त्वचा संबंधी बीमारियों के पीछे स्वच्छता की कमी, पोषण की समस्या और जागरूकता का अभाव प्रमुख कारण हो सकते हैं। ऐसे में स्कूलों के साथ-साथ अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य और साफ-सफाई को लेकर जागरूक होने की आवश्यकता है। सरकार की पहल से आने वाले समय में बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।








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