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केंद्रीय मंत्री से मिलकर सीएम धामी ने की चार नदियों की वन स्वीकृतियों की मांग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्वतीय नदियों में मानसून के दौरान जमा उपखनिज (आरबीएम) को बाढ़ नियंत्रण एवं नदी किनारों पर स्थित वन एवं कृषि भूमि की सुरक्षा करने, आपदा प्रबन्धन के निवारणात्मक उद्देश्यों को पूरा करने, नदी तल के ऊपर उठने पर नियंत्रण पाने और आम जनता व विशेष रूप से किसानों के नदी तटीय अधिकारों के संरक्षण करने हेतु हटाया जाना अत्यन्त आवश्यक है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से नई दिल्ली में भेंट की। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से 4 नदियों गौला, शारदा, दाबका एवं कोसी की वन स्वीकृतियां इस सत्र के अन्त तक अर्थात् 31 मई, 2023 तक वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत शीघ्र विस्तार किए जाने एवं आगामी दस वर्षों तक नवीनीकृत करने हेतु सम्बन्धित को निर्देशित करने के लिए अनुरोध किया। वन मंत्री ने इस अनुरोध पर शीघ्र ही उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय नदियों में मानसून के दौरान जमा उपखनिज (आरबीएम) को बाढ़ नियंत्रण एवं नदी किनारों पर स्थित वन एवं कृषि भूमि की सुरक्षा करने, आपदा प्रबन्धन के निवारणात्मक उद्देश्यों को पूरा करने, नदी तल के ऊपर उठने पर नियंत्रण पाने और आम जनता व विशेष रूप से किसानों के नदी तटीय अधिकारों के संरक्षण करने हेतु हटाया जाना अत्यन्त आवश्यक है। इन नदियों से आरबीएम की उपलब्धता सिविल निर्माण कार्यों, धार्मिक व सामरिक रूप से आवश्यक सड़क और रेल नेटवर्क का विस्तार जैसे अति महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहत जरूरी है जो लगभग 50,000 स्थानीय और प्रवासी श्रमिकों को सार्थक रोजगार भी प्रदान करता है।

वर्तमान में भी वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा उपरोक्त 4 नदियों की वन स्वीकृति को 28 फरवरी, 2023 तक बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से इन 4 नदियों गौला, शारदा, दाबका एवं कोसी की वन स्वीकृतियां इस सत्र के अन्त तक अर्थात् 31 मई, 2023 तक वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत शीघ्र विस्तार किए जाने एवं आगामी दस वर्षों तक नवीनीकृत करने का अनुरोध किया।

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