सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में एकत्रित होने लगे थे। इसके बाद पार्टी नेताओं के नेतृत्व में जुलूस के रूप में सचिवालय की ओर कूच किया गया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की गई थी।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड में भूमि घोटालों और अवैध कब्जों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी, वन एवं ग्राम समाज की भूमि पर संगठित तरीके से कब्जे किए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहे हैं। गोदियाल ने कहा कि प्रदेश की बहुमूल्य भूमि को बचाने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए, लेकिन इसके विपरीत भू-माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज्य के कई जिलों में सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी समय पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई मामलों में प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण जांच और कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है और इसकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अवैध कब्जों और भूमि घोटालों पर जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पार्टी का कहना है कि भूमि संबंधी अनियमितताओं के कारण आम लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंच रहा है।
कांग्रेस ने राज्य सरकार के समक्ष कई मांगें भी रखीं। पार्टी ने राज्यभर में सरकारी, वन और ग्राम समाज की भूमि पर हुए सभी अवैध कब्जों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है। कांग्रेस का कहना है कि केवल जांच की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
पार्टी नेताओं ने यह भी मांग की कि भूमि घोटालों से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए एक विशेष तंत्र बनाया जाए, जिससे किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना कम हो सके। उनका कहना है कि राज्य की प्राकृतिक और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है।
मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। सचिवालय पहुंचने के बाद पार्टी नेताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया। कांग्रेस ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द उचित कदम नहीं उठाए तो पार्टी राज्यभर में जनआंदोलन शुरू करेगी।
वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भूमि घोटालों और अवैध कब्जों का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल, कांग्रेस के इस प्रदर्शन ने राज्य में भूमि संरक्षण, अतिक्रमण और भू-माफियाओं की गतिविधियों को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर क्या रुख अपनाती है तथा अवैध कब्जों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई करती है।


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