Saturday , 5 September 2026
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उत्तराखंड न्यूज़चमोलीसरोकार

दूषित पानी बना बीमारी की वजह: सिरपा गांव में 40 से अधिक लोग बीमार, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में आपूर्ति की जा रही पेयजल लाइन से गंदा और दूषित पानी आ रहा है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब पेयजल निगम ने भी पानी की सैंपलिंग कराने की बात कही है।

सिरपा गांव में करीब 40 से अधिक परिवार निवास करते हैं। जिला पंचायत सदस्य विक्रम कठैत ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गांव में अचानक बड़ी संख्या में लोग बुखार, कमजोरी और पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित हो गए। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझा, लेकिन जब लगातार कई लोग बीमार पड़ने लगे तो चिंता बढ़ गई।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दो ग्रामीणों को बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर भेजना पड़ा, जबकि अन्य मरीजों का इलाज गांव में ही किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग और ग्राफिक एरा अस्पताल की टीम गांव पहुंचकर लगातार मरीजों की जांच कर रही है तथा दवाइयां वितरित की जा रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी की मुख्य वजह पेयजल लाइन से आ रहा गंदा पानी है। कई घरों में पानी का रंग मटमैला दिखाई दे रहा है और उसमें बदबू भी आ रही है। लोगों ने प्रशासन और पेयजल निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार तीसरे दिन भी गांव में डटी रही। टीम ने प्रभावित लोगों की जांच कर दवाइयां दीं और ग्रामीणों को उबला हुआ पानी पीने तथा साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी।

चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी से वायरल बुखार, टाइफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है।

हालांकि उपचार के बावजूद ग्रामीणों की हालत में तेजी से सुधार नहीं हो रहा, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। अब बीमारी के असली कारण का पता लगाने के लिए पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी।

पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि सिरपा गांव की पेयजल योजना ग्राम पंचायत को हैंडओवर की जा चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। विभागीय कर्मचारियों को गांव भेजा जा रहा है और जल्द ही पानी की सैंपलिंग कर जांच की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि पानी में किसी प्रकार का संक्रमण या गंदगी पाई जाती है तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

इधर, देवाल ब्लॉक के दूरस्थ बलाण गांव में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को स्वास्थ्य शिविर लगाया। यहां बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित 50 से अधिक लोगों की जांच की गई और उन्हें दवाइयां वितरित की गईं।

बलाण गांव के प्रधान खीमी राम, बीडीसी सदस्य प्रदीप दानू और सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र कुमार की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। सीएचओ आकांक्षा रावत, एएनएम सुनीता देवी और आशा कार्यकर्ता राधा देवी ने ग्रामीणों की जांच की।

सीएचओ आकांक्षा रावत ने बताया कि सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार और दवाइयां दे दी गई हैं तथा अब उनकी स्थिति सामान्य है।

क्षेत्र में केवल दूषित पानी ही नहीं बल्कि पेयजल संकट भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। आदिबदरी क्षेत्र के पीपलचट्टी और बौंली गांवों में पिछले एक सप्ताह से पानी की आपूर्ति बाधित है।

बौंली गांव के लोगों का कहना है कि एक सप्ताह से अधिक समय से नलों में पानी नहीं आया है, जिससे उन्हें प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारी सूरज रावत ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

जल संस्थान के कर्मचारियों के अनुसार गर्मियों में पानी की खपत बढ़ने से दिक्कत आ रही है और जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य कर दिया जाएगा।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए और पानी के स्रोतों की नियमित सफाई जरूरी है।

सिरपा गांव की घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित विभाग जल्द ठोस कदम उठाकर समस्या का स्थायी समाधान करेंगे।

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