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गढ़वाल विवि की पीएचडी प्रवेश परीक्षा पर विवाद, मोबाइल इस्तेमाल और पारदर्शिता पर उठे सवाल

हेमवती नंदन बहुगुणा (एचएनबी) गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा रविवार को विवादों में घिर गई। विश्वविद्यालय के चौरास परिसर सहित चार परीक्षा केंद्रों पर आयोजित परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के कथित इस्तेमाल, बिजली आपूर्ति बाधित होने और परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए छात्र नेताओं ने हंगामा किया। परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्र नेताओं और शिक्षकों के बीच तीखी बहस भी हुई, जिसके चलते स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कीर्तिनगर पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। छात्र नेताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए परीक्षा को पूरी तरह नियमों के अनुरूप संपन्न बताया है।

रविवार को आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने श्रीनगर, देहरादून, टिहरी और दिल्ली में चार परीक्षा केंद्र बनाए थे। परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरों और जैमर की व्यवस्था भी की गई थी ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके। हालांकि छात्र नेताओं का आरोप है कि परीक्षा के दौरान लगभग आधे घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे जैमर के निष्क्रिय होने की आशंका पैदा हुई और परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र के भीतर ड्यूटी पर तैनात कुछ शिक्षक मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए दिखाई दिए। उनका कहना है कि यदि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल हुआ है तो यह गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि परीक्षा ड्यूटी में लगे सभी शिक्षकों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कराई जाए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

वहीं छात्रसंघ महासचिव अनुरोध पुरोहित ने परीक्षा समन्वयक और टिहरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण निरीक्षक की अनुमति से परीक्षा कक्ष से बाहर आने के दौरान उन्होंने एक अधिकारी को मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो बनाते देखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी के परिजन भी उसी परीक्षा में शामिल थे, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। छात्र नेताओं ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्र नेताओं और शिक्षकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विवाद बढ़ने पर परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कीर्तिनगर पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में मामला शांत कराया गया।

दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार और तथ्यों से परे बताया है। पीएचडी प्रवेश परीक्षा के समन्वयक डॉ. प्रीतम नेगी ने कहा कि परीक्षा पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक शांतिपूर्वक संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि लगभग साढ़े बारह बजे एक अभ्यर्थी की तबीयत खराब होने पर उसे मानवीय आधार पर परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति दी गई थी। बाद में उस अभ्यर्थी ने दोबारा परीक्षा देने का अनुरोध किया, जिसे विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार अस्वीकार कर दिया गया। इसी के बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।

डॉ. नेगी ने स्पष्ट किया कि संबंधित अभ्यर्थी की वीडियो रिकॉर्डिंग केवल आधिकारिक अभिलेख और रिपोर्टिंग के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुसार थीं। यदि किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो विश्वविद्यालय नियमानुसार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए कुल 1033 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 770 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 263 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। चारों परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा निर्धारित समय पर संपन्न हुई। फिलहाल छात्र संगठनों की शिकायतों और विश्वविद्यालय प्रशासन के स्पष्टीकरण के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यदि औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो विश्वविद्यालय इस पूरे विवाद की जांच किस प्रकार कराता है और क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।

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