करीब ₹359.02 लाख की लागत से बनने वाले अल्केश्वर घाट के पुनर्स्थापन कार्य से घाट की संरचना को मजबूत और सुरक्षित बनाया जाएगा। यह घाट न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन का भी अहम हिस्सा है। मंत्री ने कहा कि घाट के विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
वहीं, ₹859.06 लाख की लागत से तैयार की गई कंसमर्दनी सैंण की बाढ़ सुरक्षा परियोजना का लोकार्पण भी किया गया। अलकनंदा नदी के किनारे बसे इस क्षेत्र में हर वर्ष बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने से खतरा बना रहता था। इस परियोजना के पूरा होने से अब बाढ़ के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
इस अवसर पर मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी विकास कार्यों को गुणवत्ता के उच्च मानकों के अनुरूप और तय समयसीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है ताकि आम जनता को समय पर लाभ मिल सके।
कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने इन योजनाओं के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
इन दोनों परियोजनाओं के जरिए श्रीनगर में धार्मिक, सामाजिक और भौतिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। आने वाले समय में ये योजनाएं क्षेत्र की पहचान को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

