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विधानसभा में 2016 से पहले के कर्मियों को लग सकता है झटका !

Employees before 2016 in the assembly may get a shock!
Employees before 2016 in the assembly may get a shock!

विधानसभा में बैक डोर भर्ती का मामला तूल पकडऩे के बाद पिछले साल विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा में हुई भर्तियों की जांच के लिए सेवानिवृत्त आइएएस डीके कोटिया की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। कोटिया कमेटी ने जांच की और रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले साल 23 सितंबर को वर्ष 2016 से 2021 तक हुई 228 तदर्थ नियुक्तियों को रद कर दिया था। बाद में इन कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था।

विधानसभा में 32 पदों पर भर्ती की भी होगी जांच

विधानसभा सचिवालय में वर्ष 2016 से पहले नियुक्त कार्मिकों को झटका लग सकता है। रविवार को इंटरनेट मीडिया में चल रही चर्चा के अनुसार हाईकोर्ट में चल रहे मामले और कोटिया कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए महाधिवक्ता ने इन कार्मिकों के नियमितीकरण के संबंध में विधिक राय देने में असमर्थता जताई है।

उधर, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने ऐसी कोई जानकारी होने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि यदि महाधिवक्ता ने कुछ कहा होता या फिर राय देने या न देने के संबंध में सरकार को कोई पत्र लिखा होता, उन्हें भी इसकी प्रतिलिपि मिलती।

विधानसभा में बैक डोर भर्ती का मामला तूल पकडऩे के बाद पिछले वर्ष विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा में हुई भर्तियोंं की जांच के लिए सेवानिवृत्त आइएएस डीके कोटिया की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की।

विधानसभा में हुई तदर्थ नियुक्तियां नियमों के तहत हुई अथवा नहीं, इस बिंदु पर कोटिया कमेटी ने जांच की और फिर रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले साल 23 सितंबर को वर्ष 2016 से 2021 तक हुई 228 तदर्थ नियुक्तियों को रद कर दिया था। बाद में इन कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था।

बर्खास्त कर्मचारी पिछले कई दिनों से आंदोलित हैं। यही नहीं, यह प्रकरण हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। इस बीच ये मांग भी उठी कि विधानसभा सचिवालय में वर्ष 2001 से वर्ष 2016 तक भी नियुक्तियां तदर्थ रूप में हुई थीं, जिनका बाद में नियमितीकरण कर दिया गया था।

इस सबको देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने हाल में महाधिवक्ता को वर्ष 2016 तक हुई नियुक्तियों के विनियमितीकरण के संबंध में विधिक राय देने के लिए पत्र भेजा। शासन को भी इसकी प्रतिलिपि भेजी गई। इस पर शासन ने भी महाधिवक्ता को पत्र लिखा था। इंटरनेट मीडिया में चल रही चर्चा के अनुसार अब इन कर्मियों के संबंध में भी कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

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