आपदा के छह दिन बाद भी प्रशासन नदारद, जैंती डांग के ग्रामीणों का फूटा ग़ुस्सा

आपदा के छह दिन बाद भी प्रशासन नदारद, जैंती डांग के ग्रामीणों का फूटा ग़ुस्सा

पौड़ी गढ़वाल के चौथान क्षेत्र में 6 अगस्त को हुई भारी बारिश और भूस्खलन की आपदा को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। देडा, सुंदर गांव, जैंती डांग और थान ग्राम सभाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इन गांवों में कई घर मलबे की चपेट में आ गए हैं, जिससे ग्रामीण भय और असुरक्षा की स्थिति में जीने को मजबूर हैं।

पौड़ी गढ़वाल में भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है, जिससे ग्रामीण रात में अपने ही घरों में नहीं रुक पा रहे हैं। मजबूर होकर लोग रात के समय सुरक्षित स्थानों या रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे हैं। स्थिति यह है कि गांव की अधिकांश सड़कें मलबे से ढकी हुई हैं, जिससे राहत कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

न बिजली, न संचार – अंधेरे में डूबे गांव

ग्रामीणों की एक और बड़ी समस्या बिजली की है। छह दिन से बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है, जिससे मोबाइल नेटवर्क, चार्जिंग और बाकी दैनिक जीवन पर बुरा असर पड़ा है। संचार सेवाएं ठप होने के कारण लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं।

सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि छह दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गांवों में पहुंचकर हालात का जायजा लेने नहीं आया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय तो नेता वोट मांगने हर घर पहुंचते हैं, लेकिन अब जब असली जरूरत है, तो कोई सुध लेने नहीं आया।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस संकट की घड़ी में क्षेत्र पंचायत सदस्य गीता देवी, संयोजक चन्दन सिंह और हीरा सिंह लगातार जनता के बीच मौजूद हैं। इन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, केवल जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी काफी नहीं है, ज़रूरी है कि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तत्काल हरकत में आए।

जैंती गांव के राकेश सिंह रावत की एक भैंस मलबे की चपेट में आकर मर गई। ग्रामीणों का कहना है कि और भी कई पशु घायल हुए हैं या लापता हैं, लेकिन कोई सहायता या मुआवज़ा अभी तक नहीं मिला है।

स्थानीय विधायक की ‘कुछ घंटे’ की झलक

ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय विधायक कुछ घंटे के लिए क्षेत्र में आए थे, लेकिन स्थिति को देखने की बजाय केवल औपचारिकता निभा कर चले गए। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और गहरी हो गई है।

ग्रामीणों की मांगें:

  • तुरंत बिजली आपूर्ति बहाल की जाए
  • भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था हो
  • नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण कर मुआवज़ा दिया जाए
  • सड़क और संचार व्यवस्था दुरुस्त की जाए
  • पशुधन हानि पर विशेष सहायता मिले

सम्पूर्ण प्रशासन और सरकार से ग्रामीणों की अपील है कि जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की जाए। संकट की घड़ी में अगर सरकार और प्रशासन साथ नहीं देगा, तो जनता का विश्वास खोने में देर नहीं लगेगी।

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