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59 साल की उम्र में भी नहीं थमा जज्बा, पूर्व सैनिक शिवानंद डंगवाल ने लद्दाख मैराथन में रचा इतिहास

भारतीय सेना की 12वीं बटालियन गढ़वाल राइफल्स के सेवानिवृत्त सूबेदार एवं मानद कैप्टन शिवानंद डंगवाल ने 59 वर्ष की उम्र में भी अपनी फिटनेस, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का शानदार परिचय दिया है। लद्दाख मैराथन 2026 में उन्होंने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में तृतीय स्थान हासिल कर अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने 122 किलोमीटर लंबी सिल्क रूट अल्ट्रा और 42.195 किलोमीटर की मैराथन में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

 

टिहरी गढ़वाल के एक दूरस्थ क्षेत्र से आने वाले शिवानंद डंगवाल का जीवन संघर्ष, अनुशासन और समर्पण की मिसाल रहा है। उन्होंने अप्रैल 1986 में भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर देशसेवा की शुरुआत की। करीब 28 वर्षों तक सैन्य सेवा देने के बाद वह अगस्त 2014 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। हालांकि, वर्दी से विदाई के बाद भी उनके भीतर चुनौती स्वीकार करने और खुद को साबित करने का जज्बा कम नहीं हुआ।

सेवानिवृत्ति के बाद शिवानंद ने लंबी दूरी की दौड़ और उच्च ऊंचाई वाले कठिन एंड्योरेंस आयोजनों में हिस्सा लेना शुरू किया। पहाड़ी परिस्थितियों में पले-बढ़े होने और सैन्य प्रशिक्षण से मिले अनुशासन ने उन्हें इन चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं के लिए मजबूत आधार दिया। उम्र बढ़ने के बावजूद उन्होंने लगातार अपनी फिटनेस बनाए रखी और कठिन से कठिन स्पर्धाओं में भाग लेकर युवाओं के सामने भी प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

उनकी उपलब्धियों की सूची लगातार लंबी होती गई है। वर्ष 2023 में उन्होंने लेह मैराथन की 42 किलोमीटर स्पर्धा में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्होंने 72 किलोमीटर लंबी खारदुंग ला चैलेंज में भी पहला स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2025 में 122 किलोमीटर की सिल्क रूट अल्ट्रा में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। अब वर्ष 2026 में इसी सिल्क रूट अल्ट्रा में तीसरा स्थान हासिल करने के साथ 42.195 किलोमीटर मैराथन में भी उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

लद्दाख जैसी ऊंचाई वाले क्षेत्र में लंबी दूरी की दौड़ प्रतिभागियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। कम ऑक्सीजन, कठिन भूगोल, ठंडे मौसम और लंबे मार्ग के बीच धावकों को शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती की भी जरूरत होती है। ऐसे वातावरण में 59 वर्ष की उम्र में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पोडियम स्थान हासिल करना शिवानंद की असाधारण सहनशक्ति और तैयारी को दर्शाता है।

भारतीय सेना ने भी पूर्व सैनिक की इस उपलब्धि की सराहना की है। सेना की ओर से कहा गया कि सूबेदार एवं मानद कैप्टन शिवानंद डंगवाल साहस, अनुशासन, दृढ़ता और अदम्य जज्बे के प्रतीक हैं। वर्दी में देश की सेवा करने के बाद भी उन्होंने कठिनतम एंड्योरेंस स्पर्धाओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सैनिक भावना को जीवंत रखा है।

शिवानंद डंगवाल की कहानी यह संदेश देती है कि उम्र किसी लक्ष्य के रास्ते में अंतिम बाधा नहीं है। दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित अभ्यास और अनुशासन के बल पर व्यक्ति किसी भी उम्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। लद्दाख में उनकी लगातार सफलता न केवल उत्तराखंड और गढ़वाल के लिए गौरव का विषय है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो उम्र या परिस्थितियों को अपने सपनों की राह में बाधा मानते हैं।

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Hill Mail

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