उत्तराखंड के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो न केवल संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि मानवता पर विश्वास भी मजबूत करती है। 25 वर्षीय एक युवती, जो सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दी गई थी, उसके अंगदान से दो गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन मिला है।
जानकारी के अनुसार, बीती 21 अप्रैल को एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवती को उसके परिजन इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे थे। युवती को तत्काल आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया, लेकिन जांच में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि हुई। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और उसे ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा।
इस कठिन समय में भी युवती के परिजनों ने अद्भुत साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अंगदान का निर्णय लिया। अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें अंगदान के महत्व और प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाया, जिसके बाद परिवार ने लीवर और किडनी दान करने की सहमति दे दी।
एम्स के पीआरओ डॉ. एल. मोहंती के अनुसार, अंगदान की पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाता है। पिछले कुछ दिनों से पांच जरूरतमंद मरीजों के ब्लड सैंपल लेकर जांच की जा रही थी, जिनमें से दो मरीजों का चयन सफल प्रत्यारोपण के लिए किया गया। अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त मात्रा में रक्त की भी आवश्यकता होती है, जिसके लिए मरीजों के परिजनों ने भी सहयोग किया।
युवती की एक किडनी को नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी फेलियर से जूझ रहे मरीज को प्रत्यारोपित किया जाएगा, जबकि लीवर ट्रांसप्लांट के जरिए एक अन्य मरीज को नई जिंदगी मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
अस्पताल प्रशासन ने इस निर्णय के लिए डोनर के परिजनों का आभार जताते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया। अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन देने का सबसे बड़ा दान है। यह पहल समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ दूसरों की जिंदगी बचाने की दिशा में एक मजबूत संदेश देती है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मानवता जिंदा है—और एक निर्णय कई जिंदगियों को रोशन कर सकता है।







