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दुनिया को कैमरे से हिमालय के अनेक रूप दिखाने वाले स्वामी सुंदरानंद नहीं रहे, तपोवन में बनेगी समाधि

हिमालय के अनगिनत रूपों को सात दशक तक अपने कैमरे से दिखाने वाले गंगोत्री के प्रमुख संत स्वामी सुंदरानंद ने 95 वर्ष की आयु में बुधवार रात शरीर त्याग दिया। उनकी पार्थिव देह को गंगोत्री में तपोवन कुटिया के पास समाधि दी जाएगी। स्वामी सुंदरानंद को बीते अक्टूबर माह में कोरोना संक्रमण भी हुआ था, हालांकि वह इसके बाद स्वस्थ हो गए थे। गंगोत्री में शीतकालीन बंदी के चलते बाबा लम्बे समय से देहरादून के प्रसिद्ध डॉक्टर अशोक लुथरा और अर्चना लुथरा के सुद्दोवाला स्थित आश्रम में रह रहे थे।

स्वामी सुंदरानंद को हिमालय के प्रसिद्ध फोटोग्राफर एवं पर्वतारोही के रूप में याद किया जाता है। स्वामी सुंदरानंद ने सिकुड़ते गंगोत्री ग्लेशियर को कई दशकों तक अपने कैमरे में कैद किया। अपनी खींची तस्वीरों के जरिए वह गंगा व हिमालय के संरक्षण का प्रयास करते रहे। एक अनुमान के मुताबिक, उन्होंने करीब ढाई लाख तस्वीरों का संग्रह किया। सितंबर 2019 में उन्होंने गंगोत्री में ‘तपोवनम् हिरण्यगर्भ कलादीर्घा’ का निर्माण भी कराया। उनका छायाकर्म इस आर्ट गैलरी में प्रदर्शित है। स्वामी सुंदरानंद की साधना को दिखाने के लिए बीबीसी और डिस्कवरी चैनल ने उनके जीवन पर डाक्यूमेंट्री भी बनाई।

वर्ष 2002 में उन्होंने अपने अनुभवों को एक पुस्तक ‘हिमालय : थ्रू ए लेंस ऑफ ए साधु’ (एक साधु के लैंस से हिमालय दर्शन) में प्रकाशित किया। इस पुस्तक का विमोचन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वामी सुंदरानंद के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, हिमालय के विशेषज्ञ फोटोग्राफर कहे जाने वाले गंगोत्री के प्रमुख संत स्वामी सुन्दरानंद जी ने अपना शरीर त्याग दिया है। स्वामी जी के जीवन से भविष्य की पीढ़ियों को प्रकृति प्रेम की प्रेरणा मिलती रहेगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे।

आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में 1926 में जन्मे स्वामी सुंदरानंद को पहाड़ों के प्रति बचपन से ही आकर्षण था। प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद 1947 में वह पहले उत्तरकाशी और यहां से गोमुख होते हुए आठ किलोमीटर दूर तपोवन पहुंचे। कुछ समय तपोवन बाबा के सानिध्य में रहने के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया।

1955 में 19,510 फुट की ऊंचाई पर कालिंदी खाल से गुजरने वाले गोमुख-बदरीनाथ पैदल मार्ग से स्वामी सुंदरानंद अपने साथियों के साथ बदरीनाथ की यात्रा पर थे। अचानक बर्फीला तूफान आ गया। वह किसी तरह बच गए। बस, यहीं से उन्होंने हिमालय के विभिन्न रूपों को कैमरे में उतारने की ठान ली। 25 रुपये में एक कैमरा खरीदा और फोटोग्राफी शुरू कर दी।

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Hill Mail

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