Saturday , 5 September 2026
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बर्फीली चुनौतियों के बीच हौसलों की उड़ान , हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 की तैयारियां तेज

यात्रा के सफल संचालन के लिए चमोली पुलिस, भारतीय सेना और घांघरिया गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने संयुक्त रूप से गोविंदघाट से श्री हेमकुंड साहिब तक पूरे मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य यात्रा मार्ग पर मौजूद सभी व्यवस्थाओं का आकलन करना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना था।


निरीक्षण के दौरान सबसे पहले पुलना गांव का जायजा लिया गया, जो वाहनों के अंतिम पड़ाव के रूप में जाना जाता है। यहां पार्किंग व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि यात्रा के दौरान यातायात सुचारू बना रहे। इसके बाद भ्यूंडार और घांघरिया में स्थित पुलिस चौकियों का निरीक्षण किया गया। चूंकि ये चौकियां सर्दियों में बंद रहती हैं, इसलिए इन्हें दोबारा संचालित करने के लिए आवश्यक संसाधनों और व्यवस्थाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया गया।

यह मार्ग विश्व प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ तक भी जाता है, जहां पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन ने संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए पहले से ही आवश्यक तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
वर्तमान में अटलाकोटी से लेकर श्री हेमकुंड साहिब तक का मार्ग भारी बर्फ से ढका हुआ है। भारतीय सेना के जवान दिन-रात बर्फ हटाने और रास्ता बनाने में जुटे हुए हैं। कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उनका जज्बा काबिले तारीफ है। संयुक्त टीम ने बर्फ हटाते हुए दरबार साहिब तक पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया।


चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि हर श्रद्धालु की यात्रा सुरक्षित और सुखद हो। “मित्रता, सेवा और सुरक्षा” के मंत्र के साथ पुलिस, सेना और गुरुद्वारा कमेटी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान गोविंदघाट गुरुद्वारे के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह, प्रभारी निरीक्षक चित्रगुप्त, उपनिरीक्षक अमनदीप सिंह और सेना के जवान भी मौजूद रहे।

कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद जिस समर्पण और तालमेल के साथ तैयारियां की जा रही हैं, वह न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाता है, बल्कि श्रद्धालुओं के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी उजागर करता है। यह यात्रा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस, सेवा और समर्पण की मिसाल भी है।

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Hill Mail

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