नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन रणनीतिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक विषयों पर विमर्श के लिए जाना जाता है। VIF की एग्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन एस. गुरुमूर्ति हैं। इसके सदस्यों में पूर्व राजदूत सतीश चंद्र, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एन.सी. विज, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, पूर्व R&AW प्रमुख सी.डी. सहाय और लेफ्टिनेंट जनरल आर.के. साहनी शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल VIF के संस्थापक डायरेक्टर रह चुके हैं।
जनरल अनिल चौहान का सैन्य करियर लंबा और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा है। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी के पूर्व छात्र हैं। वर्ष 1981 में उन्हें 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन मिला था। मेजर जनरल के पद पर उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बारामूला सेक्टर में एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने नॉर्थ-ईस्ट में एक कोर का नेतृत्व किया।
सितंबर 2019 से मई 2021 तक जनरल चौहान ईस्टर्न कमांड के GOC-in-C रहे। इसके बाद सितंबर 2022 में उन्हें देश का दूसरा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया। CDS के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और सैन्य मामलों में संयुक्तता बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया।
VIF में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले भी जनरल चौहान फाउंडेशन के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। हाल के महीनों में वह VIF की ‘विमर्श’ (VIMARSH) संवाद श्रृंखला में नियमित वक्ताओं में शामिल रहे। इन कार्यक्रमों में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के घटनाक्रम सहित राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपने आकलन और विचार साझा किए।
फाउंडेशन के अनुसार, VIF नई दिल्ली में राजनयिक समुदाय के साथ भी संवाद करता है। इसका उद्देश्य भारत के राजनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक और सभ्यतागत हितों से जुड़े दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखना तथा विभिन्न देशों के विचारों और दृष्टिकोणों को समझना है। जनरल चौहान की नियुक्ति के बाद रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इन विमर्शों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।


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