दर्द से जीत तक: नाई गांव के भाई-बहन ने साउथ एशिया चैंपियनशिप में रचा स्वर्णिम इतिहास

दर्द से जीत तक: नाई गांव के भाई-बहन ने साउथ एशिया चैंपियनशिप में रचा स्वर्णिम इतिहास

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के एक छोटे से गांव नाई से निकली प्रेरणादायक कहानी आज पूरे देश को गर्व से भर रही है। पोखड़ा ब्लॉक की पिंगला पाखा पट्टी के नाई गांव के भाई-बहन अविघ्न नेगी और रिद्धिमा नेगी ने साउथ एशिया चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-दो स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।

श्रीलंका के डिगाना स्टेडियम में आयोजित तीसरी साउथ एशिया चैंपियनशिप के अंतर्गत हुई जु-जित्सु प्रतियोगिता में दोनों ने अपने-अपने वर्गों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अविघ्न नेगी, जो हल्द्वानी के सेंथिया स्कूल में कक्षा 9 के छात्र हैं, ने अंडर-16, 40 किलोग्राम वर्ग में जु-जित्सु निवाजा और फाइटिंग कैटेगरी में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं उनकी बड़ी बहन रिद्धिमा नेगी, जो कक्षा 12 की छात्रा हैं, ने एडल्ट 45 किलोग्राम वर्ग में जु-जित्सु और निवाजा फाइटिंग में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इन दोनों की सफलता सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, हिम्मत और आत्मविश्वास की मिसाल भी है। उनकी मां दीपिका नेगी ने बताया कि परिवार ने हाल ही में एक गहरा दुख सहा है। उनके पति और बच्चों के पिता अनिल सिंह नेगी, जो दिल्ली में एक कंपनी में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे, 16 मार्च को एक कार हादसे में असमय दुनिया को अलविदा कह गए। इस हादसे ने परिवार को झकझोर कर रख दिया, लेकिन बच्चों ने इस दुख को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
पिता के निधन के महज कुछ दिनों बाद, 22 मार्च को दोनों का चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस चैंपियनशिप के लिए हुआ। कठिन परिस्थितियों और मानसिक आघात के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा और 11 व 12 अप्रैल को आयोजित प्रतियोगिता में स्वर्णिम सफलता हासिल की।
गांव के शिक्षक हरपाल सिंह रावत ने बताया कि जैसे ही बच्चों की इस उपलब्धि की खबर गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। लोग इसे गांव के लिए गर्व का क्षण मान रहे हैं। वहीं, अविघ्न और रिद्धिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, परिवार और उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया।
इन दोनों भाई-बहन की यह उपलब्धि न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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