Home उत्तराखंड न्यूज़ गढ़वाल विवि फर्जी डिग्री रैकेट: दून से एक और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस को मिले अहम दस्तावेज
उत्तराखंड न्यूज़क्राइमदेहरादूनपौड़ी गढ़वालसरोकार

गढ़वाल विवि फर्जी डिग्री रैकेट: दून से एक और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस को मिले अहम दस्तावेज

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री, अंकतालिकाएं, जाली मोहरें और अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर जांच को आगे बढ़ाया है। पुलिस ने देहरादून के रायपुर क्षेत्र से 20 वर्षीय देवांश पांडेय को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से फर्जी अंकतालिकाएं, कूटरचित दस्तावेज और कई अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार यह मामला केवल फर्जी डिग्री तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से विभिन्न स्थानों पर इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करने और लाभ लेने की आशंका भी जताई जा रही है। इसी वजह से पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है।

मामले की शुरुआत 25 मार्च 2026 को हुई थी, जब गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रो. जे.एस. चौहान ने कोतवाली श्रीनगर में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कासिफ कलीम और उसके अन्य साथियों ने विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्रियां, अंकतालिकाएं, मोहरें और अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर तैयार कर उनका विभिन्न स्थानों पर उपयोग किया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले मुख्य आरोपी कासिफ कलीम को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसी क्रम में देवांश पांडेय की भूमिका सामने आने पर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और आखिरकार उसे देहरादून के रायपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार के निर्देश पर गठित विशेष पुलिस टीम इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और इसके तार अन्य राज्यों या संस्थानों तक भी जुड़े होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच भी करवा रही है।

कोतवाली श्रीनगर के प्रभारी निरीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के पास से बरामद दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां और अंकतालिकाएं उपलब्ध कराई गईं तथा इनका उपयोग किन-किन स्थानों पर किया गया। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और जल्द ही कुछ अन्य लोगों से पूछताछ की जा सकती है।

पुलिस का मानना है कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों का यह नेटवर्क शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के अपराध को अंजाम देने का साहस न कर सके।

गिरफ्तार आरोपी देवांश पांडेय को न्यायालय में पेश कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है। वहीं पुलिस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा पूरे रैकेट का खुलासा होने की उम्मीद है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

उत्तराखंड में अब गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में भी प्रसारित होगी ‘मन की बात’

उत्तराखंड की लोकभाषाओं, संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने की दिशा में...

देहरादून: छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में शिक्षक निलंबित, FIR दर्ज

राजधानी देहरादून के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में छात्रा के साथ कथित...