उत्तराखंड सहकारिता के क्षेत्र में देश के पर्वतीय राज्यों के बीच अग्रणी बनकर उभरा है। संसद में हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सहकारी समितियों, बागवानी और संबद्ध उत्पादों के विपणन को लेकर पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) के माध्यम से पर्वतीय राज्यों में कृषि, बागवानी तथा संबद्ध क्षेत्रों को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान पर्वतीय राज्यों को उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। साथ ही तकनीकी सहयोग और बाजार व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विभिन्न पर्वतीय राज्यों में एनसीडीसी के नए कार्यालय भी स्थापित किए गए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और स्थानीय उत्पादों की पहुंच राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बढ़ाना है।
अमित शाह ने जानकारी दी कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) तथा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय राज्यों के कृषि एवं जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के किसानों को अब तक 2,488 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं, एनसीओएल के माध्यम से राज्य के किसानों से 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूं, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती तथा 30 मीट्रिक टन जैविक स्वीटनर्स की खरीद की गई है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य भी मिल रहा है।
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच पर्वतीय राज्यों को एनसीडीसी द्वारा दी गई ₹422.95 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता में से ₹287.95 करोड़, यानी लगभग 68 प्रतिशत, अकेले उत्तराखंड को प्राप्त हुए हैं। यह सभी पर्वतीय राज्यों में सबसे अधिक है और राज्य की सहकारिता व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सदस्यता के मामले में भी देश के पर्वतीय राज्यों में शीर्ष पर है। राज्य की 551 सहकारी समितियां BBSSL, 487 समितियां NCEL तथा 387 समितियां NCOL की सदस्य हैं। इतना ही नहीं, एनसीईएल की कुल सदस्य समितियों में लगभग 56 प्रतिशत और एनसीओएल की लगभग 54 प्रतिशत सदस्य समितियां अकेले उत्तराखंड की हैं, जो राज्य की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती हैं।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के कृषि, बागवानी और जैविक उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएंगे। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि “सहकारिता से समृद्धि” का संकल्प उत्तराखंड में तेजी से साकार हो रहा है और आने वाले समय में राज्य पूरे देश के लिए सहकारिता का आदर्श मॉडल बन सकता है।








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