नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार शीशमबाड़ा में जमा लीगेसी वेस्ट का निस्तारण लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। कंपनी का अनुबंध अगले माह समाप्त होने वाला है, लेकिन तय समय सीमा के भीतर वर्षों से जमा कूड़े के विशाल ढेर को पूरी तरह हटाया जाना संभव नहीं दिख रहा। यही कारण है कि नगर निगम ने कंपनी के कार्यों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, कंपनी का दावा है कि उसने लगभग 90 प्रतिशत लीगेसी वेस्ट का निस्तारण कर दिया है। दूसरी ओर नगर निगम की निगरानी टीम और निरीक्षण रिपोर्ट इस दावे से सहमत नहीं हैं। निगम का अनुमान है कि अब तक करीब 60 प्रतिशत कचरा ही हटाया गया है। दोनों आंकड़ों में भारी अंतर होने के कारण अब ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि कंपनी का दावा कितना सही है और उसे शेष भुगतान किया जाए या नहीं।
नगर निगम ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए पिछले सात माह से उसका भुगतान भी रोक रखा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि ड्रोन सर्वे में कंपनी के दावे गलत पाए गए तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शीशमबाड़ा प्लांट देहरादून नगर निगम के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। नगर निगम क्षेत्र के लगभग 100 वार्डों से प्रतिदिन 500 से 550 मीट्रिक टन ठोस कचरा एकत्र किया जाता है। यह कचरा करीब 280 डोर-टू-डोर कलेक्शन वाहनों के माध्यम से विभिन्न ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है, जहां से बड़े वाहनों द्वारा शीशमबाड़ा प्रोसेसिंग प्लांट लाया जाता है। पिछले डेढ़ वर्ष में प्लांट की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाकर लगभग 550 से 600 टन प्रतिदिन कर दी गई है, ताकि रोजाना आने वाले नए कचरे के साथ-साथ पुराने लीगेसी वेस्ट का भी वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सके।
हालांकि, शीशमबाड़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों के विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं का केंद्र बना हुआ है। आसपास के लोगों का आरोप है कि यहां अब भी हजारों टन पुराना कचरा पड़ा हुआ है, जिससे दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीण कई बार प्लांट को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग भी उठा चुके हैं।
इसी बीच नगर निगम ने शीशमबाड़ा प्लांट के स्थानांतरण की प्रक्रिया को भी दोबारा गति दी है। अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में आधुनिक तकनीक और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के जरिए ऐसी समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा। फिलहाल प्राथमिकता लीगेसी वेस्ट की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और उसके निस्तारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने कहा कि ड्रोन सर्वे पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। सर्वे के माध्यम से डंपिंग क्षेत्र की सटीक मैपिंग की जाएगी और उसी आधार पर कंपनी के कार्यों का मूल्यांकन होगा। यदि कंपनी के दावे तथ्यात्मक रूप से गलत पाए गए तो अनुबंध की शर्तों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम जनता के हितों और पर्यावरण संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट अब शीशमबाड़ा में वर्षों से जमा कूड़े के पहाड़ की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी। इसके साथ ही यह भी तय होगा कि लीगेसी वेस्ट निस्तारण परियोजना कितनी सफल रही और भविष्य में देहरादून के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए क्या रणनीति अपनाई जाएगी।


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