उत्तराखंड में कैंसर के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में कैंसर मरीजों की कुल संख्या 12,642 तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7.3 प्रतिशत अधिक है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तेज कर दी है और लोगों से समय पर जांच कराने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे तंबाकू और धूम्रपान का सेवन, शराब की लत, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता वायु प्रदूषण और बदलती जीवनशैली प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के अधिकांश मामलों में शुरुआती चरण में पहचान होने पर इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की स्क्रीनिंग और जांच सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती अवस्था में ही हो सके। विभाग ने विशेष रूप से 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि लंबे समय तक खांसी बनी रहे, शरीर में असामान्य गांठ महसूस हो, बिना कारण वजन कम हो, लगातार थकान रहे, मुंह में लंबे समय तक न भरने वाले छाले हों या किसी प्रकार का असामान्य रक्तस्राव हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।
डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर से बचाव के लिए तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना और प्रदूषण से बचाव जैसे उपाय बेहद प्रभावी हैं। समय पर जांच और सही उपचार से कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी कैंसर को दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक मानता है। संगठन के अनुसार, यदि रोकथाम, समय पर जांच और उपचार की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में कैंसर के मामलों में और तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को कम करने में अपनी भूमिका निभाएं। विभाग का मानना है कि जनजागरूकता, समय पर जांच और बेहतर उपचार सुविधाओं के माध्यम से कैंसर के बढ़ते बोझ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।








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