पंचकेदारों में चतुर्थ केदार माने जाने वाले भगवान रुद्रनाथ के कपाट सोमवार 18 मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधि-विधान के साथ खोल दिए जाएंगे। इससे पहले रविवार को भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर से पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मूल धाम के लिए रवाना हुई। इस दौरान पूरा गोपेश्वर “हर-हर महादेव”, “जय रुद्रनाथ” और “जय गोपीनाथ” के जयघोषों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने डोली यात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
रविवार सुबह गोपीनाथ मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ डोली यात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली को भव्य तरीके से सजाया गया था। डोली के प्रस्थान के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और मंदिर परिसर पूरी तरह आस्था के रंग में रंग गया। इस वर्ष रुद्रनाथ मंदिर में पंडित हरीश भट्ट मुख्य पुजारी के रूप में पूजा-अर्चना संपन्न कराएंगे।
रुद्रनाथ गोपीनाथ मंदिर प्रबंधन समिति और महिला मंगल दलों ने श्रद्धालुओं और अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। वहीं भारतीय सेना के जवानों द्वारा बजाए गए बैंड की मधुर ध्वनियों ने पूरे माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। सेना के बैंड की धुनों के बीच जब डोली आगे बढ़ी तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
इधर, चारधाम यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। ऋषिकेश स्थित चारधाम ट्रांजिट कैंप में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। रविवार को रिकॉर्ड 15,604 श्रद्धालुओं ने ऑफलाइन पंजीकरण कराया। सुबह से शाम तक यात्रियों की लंबी कतारें लगी रहीं। इसके अलावा संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की ओर से सबसे अधिक 55 बसों को विभिन्न धामों के लिए रवाना किया गया, जिनमें 1,696 यात्री सवार थे।
चारधाम यात्रा इस वर्ष 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और अब धीरे-धीरे यात्रा अपने चरम की ओर बढ़ रही है। वहीं पंचकेदारों में द्वितीय केदार माने जाने वाले मद्महेश्वर धाम के कपाट भी 21 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। ऐसे में पूरे गढ़वाल हिमालय में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है।
रुद्रनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा। माना जाता है कि रुद्रनाथ धाम में भगवान शिव के मुख रूप की पूजा की जाती है और यहां पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।







