राष्ट्र निर्माण में शासन की महत्वपूर्ण भूमिका, तानाशाही से कमजोर होता है देश : अजीत डोभाल

राष्ट्र निर्माण में शासन की महत्वपूर्ण भूमिका, तानाशाही से कमजोर होता है देश : अजीत डोभाल

एनएसए ने सरदार पटेल स्मारक व्याख्यान में बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल की हाल ही घटनाओं को कुशासन का उदाहरण बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में शासन की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा और प्रगति के लिए प्रभावी शासन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, किसी राष्ट्र की असली ताकत उसकी सरकारों की ताकत में होती है। तानाशाही से देश कमजोर होते हैं। साथ ही जोड़ा कि बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल की हालिया घटनाएं कुशासन का उदाहरण सामने रखती हैं।

एनएसए अजीत डोभाल हर साल होने वाले शासन पर सरदार पटेल स्मारक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आज के भारत में खासकर महत्वपूर्ण परिवर्तन के इस दौर में, सरदार पटेल के दृष्टिकोण की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, मैं इस पर अपना नजरिया साझा करना चाहता हूं कि एक सुरक्षाकर्मी शासन प्रक्रिया को कैसे देखता है। मेरा मानना है कि राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ राष्ट्र की सुरक्षा और उसके लक्ष्यों व आकांक्षाओं को प्राप्त करने में शासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा, जब सरकारें कमजोर, स्वार्थी या भ्रमित होती हैं तो परिणाम भी वैसा ही होता है। संस्थान राष्ट्र की रीढ़ होते हैं और जो लोग उन्हें बनाते और पोषित करते हैं, वही राष्ट्र की नींव मजबूत करते हैं।

तानाशाही से देश पतन की ओर बढ़ता है

अजीत डोभाल ने कहा कि महान साम्राज्यों, लोकतंत्रों और राजतंत्रों का पतन हमेशा गलत शासन से हुआ है। जब शासन तानाशाही हो जाता है और संस्थाएं कमजोर पड़ने लगती हैं तो देश पतन की ओर बढ़ता है। उन्होंने कहा, सरकार को सामान्य अपेक्षाओं से आगे जाकर काम करना चाहिए।

एनएसए ने कहा, भारत न सिर्फ एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, बल्कि एक खास तरह के शासन और सरकारी ढांचे, सामाजिक ढांचे और वैश्विक व्यवस्था में अपनी जगह से भी एक क्रमिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। दुनिया भी एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। जब भी बदलाव आता है, सबसे जरूरी होता है स्पष्ट दृष्टिकोण। इससे आप विपरीत परिस्थितियों और संभावित खतरों से नहीं घबराते। आपको खुद को तैयार करना होगा और खुद को सुसज्जित करना होगा।

मोदी के शासन मॉडल की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन मॉडल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक निश्चित प्रकार के शासन, एक निश्चित प्रकार की सरकार और सामाजिक संरचना से, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में अपने स्थान से भी एक व्यापक बदलाव कर रहा है।

उन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए वर्तमान सरकार द्वारा किए गए संस्थागत बदलावों पर भी प्रकाश डाला, जिससे संकेत मिलता है कि संभवतः और भी उपाय किए जा रहे हैं।

महिलाओं का सशक्तिकरण जरूरी

उन्होंने कहा कि आधुनिक नई दुनिया में सुशासन के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण जरूरी है। मेरा मानना है कि न केवल अच्छे कानून, अच्छी संरचनाएं और अच्छी व्यवस्थाएं होना जरूरी हैं, बल्कि उससे भी ज्यादा जरूरी है कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

एनएसए ने शासन में तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि हमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना होगा जो ज्यादा पारदर्शिता, जवाबदेही और आम आदमी तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि हमें समाज को साइबर खतरों या तकनीक से पैदा होने वाले कई अन्य खतरों से बचाना होगा।

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