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गैरसैंण अब उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी, राज्यपाल ने दी मंजूरी

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ उत्तराखंड के लोगों की एक पुरानी मांग या कहें कि मन की मुराद त्रिवेंद्र सरकार ने पूरी कर दी है। अब राज्य की दो राजधानियां होंगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च में भराड़ीसैंण में हुए बजट सत्र के दौरान यह बड़ी घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी अब गैरसैंण (भराड़ीसैंण) होगी।

प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सोमवार को इस बाबत आदेश जारी कर दिया। उनकी ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया, ‘राज्यपाल भराड़ीसैंण (गैरसैंण), जिला चमोली को उत्तराखंड राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।’

 

गैरसैंण को राज्य की राजधानी बनाने के लिए काफी समय से मांग की जा रही थी। इसके लिए आंदोलन भी हुए थे। उत्तर प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनने के बाद से ही पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ में बनाए जाने को लेकर मांग की जाती रही है। राज्य में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, वह गैरसैंण को ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकीं। काफी समय से उत्तराखंड की राजधानी का मुद्दा लोगों की भावनाओं से जुड़ा था। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का वादा भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प में भी किया था।

जब सीएम ने अचानक किया था ग्रीष्णकालीन राजधानी का ऐलान

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आपको बता दें कि उत्तराखंड देश का पांचवां राज्य है, जिसकी 2-2 राजधानियां हैं। आंध्र प्रदेश में 3 राजधानियों का प्रस्ताव है तो हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में 2-2 राजधानियां हैं। जम्मू-कश्मीर में भी 2 राजधानी हैं लेकिन पिछले साल इसे राज्य की सूची से हटाकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था।

उत्तराखंड में प्रशासकीय तौर पर दो मंडल हैं। पहला कुमाऊं और दूसरा गढ़वाल। यूपी से अलग होकर अलग राज्य बनने के बाद गढ़वाल और राज्य की सीमा पर स्थित देहरादून को राजधानी बनाया गया तो कुमाऊं के नैनीताल में हाई कोर्ट बना रहा। इसके अलावा उत्तराखंड देश के चुनिंदा राज्यों में शुमार है, जहां राज्यपाल के लिए दो राजभवन हैं। पहला देहरादून और दूसरा नैनीताल में स्थित है। ग्रीष्मकाल में राज्यपाल यहां प्रवास पर आते हैं। अब इस फैसले के बाद प्रदेश की दो राजधानियां भी होंगी।

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Hill Mail

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