Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ रिवर्स माइग्रेशन, ऑर्गेनिक खेती, महिला सशक्तिकरण, ई-कनेक्टिविटी एवं अध्यात्म के लक्ष्य को लेकर राज्यपाल सक्रिय
उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरदेहरादून

रिवर्स माइग्रेशन, ऑर्गेनिक खेती, महिला सशक्तिकरण, ई-कनेक्टिविटी एवं अध्यात्म के लक्ष्य को लेकर राज्यपाल सक्रिय

चीन और पाकिस्तान में अपनी तेज़ तर्रार छवि के लिए महशूर, पिछले एक वर्ष में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने अपने सैन्य कैरियर की तरह एक सक्रिय और ज़ज़्बे से भरपूर लीडर की तरह अपने दायित्वों पर खरे उतरे हैं। एक साल पूर्ण होने पर हिल मेल ने उनके इस सफर को उनके प्रयासों से पिरोने की कोशिश की है। सेना में उनकी लगभग 40 वर्षों की सेवा के दौरान ले जनरल गुरमीत सिंह को थल सेनाध्यक्ष द्वारा दो और चार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राज्यपाल ने सेना में अपने कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड के बनबसा में भी सेवा की थी।

इस एक साल में राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह ने एक सक्रिय लीडर की तरह पूरे उत्तराखंड को एक सूत्र में बंधने की कोशिश की है। राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने के तीन माह के पश्चात ही ले जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) के सभी जिलों का भ्रमण कर जनपदों की महिलाओं, पूर्व सैनिकों, किसानों तथा जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और वहां की समस्याओं के साथ-साथ वहां की संभावनाओं को भी बहुत करीब से देखा।

उत्तराखंड के विकास को ज़मीन पर उतारने के लिए राज्यपाल ने 5 प्वाइंट लक्ष्य पर काम करना शुरू किया और उनको लेकर काफी सुदृढ़ हैं। जिनमें रिवर्स माइग्रेशन, ऑर्गेनिक खेती का विकास, महिला क्षमता विकास, ई-कनेक्टिविटी स्थापना विकास एवं अध्यात्म विकास शामिल हैं। उत्तरकाशी भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने जनपद में कृषि, उद्यान, पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म एवं अध्यात्म के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाये जाने की आवश्यकता बताई। जिससे जनपद की विश्व पटल पर विशेष पहचान बन सके। वहीं अल्मोड़ा भ्रमण के दौरान आस्था को लेकर सजग राज्यपाल ने उत्तराखंड में धार्मिक यात्राओं का सर्किट बनाने पर हमेशा ज़ोर दिया और चारधाम के अलावा अन्य धार्मिक स्थानों को भी इससे जोड़ना की बात कही।

राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह ने सिख धर्म से जुड़े श्रद्धालुओं को उत्तराखंड से जोड़ने के लिए एक सर्किट बनाने का आव्हन किया जिसमें विश्व में जितने भी गुरु नानक के अनुयायी हैं वे भी हेमकुंड, रीठा साहिब, नानकमत्ता, देहरादून, हरिद्वार में स्थित गुरुद्वारों में आस्था में सरोबार होकर अपने जीवन को नए आयाम दे सके। इसके लिए उन्होंने कहा हमें सड़क मार्ग, हेलीपैड व संचार व्यवस्थाओं को और अधिक विकसित करना होगा।

वहीं रिवर्स पलायन को लेकर मुखर रहे राज्यपाल सिंह ने पिथौरागढ़ में अपने दौरे के दौरान पलायन को लेकर चिंता जाहिर की उन्होंने कहा कि सीमांत जिले में रिवर्स पलायन को लेकर ठोस कदम उठाने होंगे और इसके लिए गांव-गांव तक रोड और संचार कनेक्टिविटी और संचार सुविधा की बहुत जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि बॉर्डर रोड्स के माध्यम से बॉर्डर के गांव और वहां लोग मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। इस संबंध में उनकी संबंधित केन्द्रीय मंत्रियों से बात हुई है। कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें बताया कि किस तरह वहां सड़कों का जाल बिछ रहा है। पिथौरागढ़ में आपदाओं को लेकर भी राज्यपाल सिंह ने चिंता जाहिर की जिसके बाद उन्होंने आपदा और पलायन से निपटने के लिए प्रशासन को मूल मंत्र दिया।

पिथौरागढ़ में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की हौसला अफज़ाई करते हुए कहा था कि हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों के माध्यम से उत्तराखंड वर्ल्ड मार्किट में मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकता है। सबसे अधिक खुशी तब होती है जब वह स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं ऐसी शक्ति हैं जो यहां बदलाव ला सकती हैं। महिलाओं, बालिकाओं व युवाओं से मैं बहुत खुश हूं। पीएम ने केदारनाथ के प्रागंण से कहा था अगला दशक उत्तराखंड का होगा। इसमें कोई शक नहीं है। जिसके कुछ ही महीनों बाद पिथौरागढ़ के जिला प्रशासन ने बेड़ू से निर्मित चटनी और जैम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपना मुरीद बना दिया उन्होंने इस प्रयास की अपने मन की बात एपिसोड में भूरी भूरी प्रशंसा की। गुंजी में आर्मी स्कूल बनाने की कवायद भी ज़ोरों पर है।

राज्यपाल का मानना है कि इस आधुनिक दौर में भी यहां बहुत पुराने ढंग से काम चल रहा है। राजभवन के प्रांगण में दस हनी बॉक्स लगाए गए थे। एक महीने में उसमें 110 किलो शहद निकला। मैंने दस हनी बॉक्स फूलों की घाटी में लगवाए। वहां एक महीने में 330 किलो शहद निकाला गया। तो आप कल्पना कीजिए हिमालय की गोद में बसी फूलों की घाटी से निकले शहद की विश्व बाजार में क्या कीमत होगी? हमें स्वयं मालूम नहीं है कि प्रभु ने हमें क्या आशीर्वाद दिया है। मैं जब भी जिलों का दौरा करके लौटा मैंने विभाग के सचिव व निदेशक से इस संबंध में बातचीत की है कि लोगों के सामने जो चुनौती है उसमें कैसे मदद की जा सकती है। उत्तराखंड में विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां हैं। उनकी ठीक तरह से मार्केटिंग हो तो यह राज्य भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया के सम्पन्न राज्यों में एक होगा।

‘सेना मेरा पहला परिवार’ अक्सर राज्यपाल के द्वारा कहे जाने यह शब्द हर किसी को गौरवांवित कर देते है। उन्होंने कहा कि वह सच्चे दिल व आत्मा से पूर्व सैनिक मेरे परिवार का हिस्सा हैं। किसी भी वीरांगना के लिए राजभवन के दरवाजे हमेशा खुले हैं। जो भी राष्ट्रीय सुरक्षा में काम करता है, चाहे वह किसी भी फोर्स से हो, मेरे लिए वह सैनिक है। उनके माता, पिता व बच्चों की कोई समस्या है तो उसके निपटारे के लिए मैंने राजभवन में अधिकारी की तैनाती की है।

राज्यपाल ने बनबसा का भी दौरा किया जहां 90 के दशक में वो बतौर कंपनी कमांडर तैनात थे। ले जनरल सिंह ने बनबसा में वन्य उत्पादों और जड़ी बूटियों आदि के व्यापार विकसित करने पर ज़ोर दिया, जिसका सही ढंग से प्रयोग कर स्थानीय जनता के जीवन स्तर को सुविधाजनक बनाया जा सके। उत्तराखंड में हिमालयी उत्पादों के छोटे-छोटे कोऑपरेटिव खोलकर बड़े पैमाने पर काम किया जा सकता है। लेकिन, अब केवल कोऑपरेटिव फार्मिंग या सोसाइटी से काम नहीं चलेगा, जब तक हम इसे कॉरपोरेट कल्चर से नहीं जोड़ेंगे। यह प्रयोग छोटे पैमाने पर सही, ऊपर पहाड़ों पर करना है।

जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि सूचना प्रौद्योगकी मंत्री ने उत्तराखंड में बेहतर नेटवर्क देने का भरोसा दिया है। जिससे कि पहाड़ों के हालात जल्द बदलेंगे। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को तकनीक से जोड़ने पर भी काफी जोर दिया वहीं विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर भी वह काफी सजग रहे और पारदर्शिता भी लाये। उन्होंने कुलपतियों की बैठक बुलाकर सभी को राज्य के विकास के लिए बराबर हिस्सा लेने के लिए आह्वाहन किया।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...