Tuesday , 15 September 2026
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‘होम्योपैथी टेलीमेडिसिन सेवा – आपके द्वार पर’ का भव्य शुभारंभ

नई दिल्ली में लखेरा होम्योपैथी सेंटर, द्वारका द्वारा 'होम्योपैथी टेलीमेडिसिन सेवा - आपके द्वार पर' का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर डॉ. लखेरा ने कहा, 'होम्योपैथी कोई चमत्कार नहीं, यह वैज्ञानिक पद्धति है, जो व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति के अनुसार इलाज करती है। यह लक्षणों को दबाने की बजाय रोग की जड़ पर काम करती है।'

सीएम पपनैं

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान लखेरा होम्योपैथी सेंटर, द्वारका द्वारा ‘होम्योपैथी टेलीमेडिसिन सेवा – आपके द्वार पर’ का विधिवत शुभारंभ किया गया। देशभर से आए पत्रकारों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम सूचना, स्वास्थ्य और आयुष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. विपिन चंद्र लखेरा ने की, जो आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक, सफदरजंग अस्पताल एवं लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में विभागाध्यक्ष तथा वर्तमान में सिक्किम के राज्यपाल के मानद फिजिशियन पद पर कार्यरत हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा की भावना

डॉ. लखेरा ने बताया कि उनकी प्रेरणा का स्रोत आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी रही है। उत्तराखंड, झारखंड, उड़ीसा और नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में सेवाकाल के दौरान उन्होंने देखा कि चिकित्सा सुविधाओं का अभाव लोगों को असमय मृत्यु और पीड़ा की ओर ले जाता है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद टेलीमेडिसिन सेवा शुरू करने का निर्णय लिया।

घर बैठे इलाज, बिना टेस्ट के होम्योपैथी उपचार

डॉ. लखेरा ने कहा कि होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है, जिसमें महंगे टेस्ट या इंश्योरेंस की आवश्यकता नहीं होती। टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीज डॉक्टर से परामर्श लेकर दवाएं घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा खासकर उन लोगों के लिए है जो दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं या समयाभाव के कारण डॉक्टर के पास नहीं जा सकते।

उन्होंने बताया कि सेवा के तहत पंद्रह दिन की दवाओं का खर्च मात्र ₹750 रखा गया है, जिसे कोरियर या डाक के माध्यम से मरीज के घर तक पहुंचाया जाएगा। इस सेवा में एलर्जी, अस्थमा, माइग्रेन, डिप्रेशन, हाइपोथायरॉइडिज्म, हृदय रोग, अनिद्रा जैसी अनेक बीमारियों का सफल उपचार किया जा रहा है। वर्तमान में केंद्र में 8 विशेषज्ञ डॉक्टर कार्यरत हैं।

टेलीमेडिसिन सेवा से 1400 मरीजों को मिला लाभ

पिछले दो महीनों में करीब 1400 मरीजों को टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से लाभ हुआ है, जिनमें 1300 ऐसे थे जो लंबे समय से निराश थे। डॉ. लखेरा ने बताया कि कई मरीज, जो एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में वर्षों इलाज कराने के बाद भी राहत नहीं पा सके, उनके केंद्र में अल्प समय में स्वस्थ होकर लौटे हैं।

होम्योपैथी – एक सुरक्षित विकल्प

डॉ. लखेरा ने कहा, ‘होम्योपैथी कोई चमत्कार नहीं, यह वैज्ञानिक पद्धति है, जो व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति के अनुसार इलाज करती है। यह लक्षणों को दबाने की बजाय रोग की जड़ पर काम करती है।’ उन्होंने यह भी बताया कि कॉफी जैसे पदार्थों से परहेज करना होम्योपैथी में जरूरी है।

नाड़ी ज्ञान की पारंपरिक विरासत

डॉ. लखेरा ने बताया कि उन्हें अपने दादा जी, अल्मोड़ा के प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य, से पारंपरिक चिकित्सा का ज्ञान मिला। वह खाली पेट नाड़ी देखकर रोग पहचानने में दक्ष हैं। उन्होंने कहा कि शरीर की सभी समस्याओं की जड़ पेट है – पाचन सही रहेगा तो शरीर स्वस्थ रहेगा।

सेहत के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी

डॉ. लखेरा ने लोगों को सलाह दी कि वे अपने ‘भीतर के डॉक्टर’ को मजबूत करें। सुबह जल्दी उठें, नियमित व्यायाम करें और मोबाइल जैसी आधुनिक वस्तुओं से दूरी बनाए रखें, जिनसे रेडिएशन होता है। उन्होंने कहा, ‘बाहर के डॉक्टर से ज्यादा जरूरी है अपने अंदर के डॉक्टर को पहचानना।’

सेवा का संपर्क माध्यम

इस सेवा से जुड़ने के लिए वेबसाइट www.lakherahomoeopathy.com पर संपर्क किया जा सकता है। डॉ. लखेरा ने बताया कि जल्द ही एक हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराया जाएगा। सोमवार को चिकित्सा केंद्र बंद रहेगा।

एलोपैथी नहीं, वैकल्पिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की आवश्यकता

कार्यक्रम के अंत में डॉ. लखेरा ने कहा कि आज फार्मा कंपनियों द्वारा एलोपैथी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि आयुर्वेद और होम्योपैथ जैसे सस्ते और सुरक्षित विकल्पों को लोगों तक पहुंचाना सरकार और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने जनजागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

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Hill Mail

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