चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड स्थित पगनो गांव में गुरुवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। पहाड़ी से तेज बहाव के साथ आए मलबे और बोल्डरों ने गांव के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा में एक आवासीय मकान की छत टूट गई, एक गोशाला बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और 30 नाली से अधिक कृषि भूमि में मलबा भर जाने से तैयार हो रही फसल बर्बाद हो गई। हादसे के दौरान 70 वर्षीय सतेश्वर प्रसाद करीब आधे घंटे तक अपने टूटे हुए मकान के अंदर फंसे रहे। ग्रामीणों ने जोखिम उठाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें मामूली चोटें आई हैं।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे पगनो गांव से लगभग तीन किलोमीटर ऊपर स्थित कमेड़ा पानी क्षेत्र की पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और बरसाती पानी तेज रफ्तार से गांव की ओर आ गया। पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में रुक-रुककर बारिश हो रही थी, जिससे पहाड़ियां पहले से ही कमजोर हो चुकी थीं। तड़के हुई तेज बारिश के बाद अचानक आए मलबे ने गांव में अफरा-तफरी मचा दी।
मलबे की सबसे अधिक मार 70 वर्षीय सतेश्वर प्रसाद के पुराने मकान पर पड़ी। उस समय वह अपनी पत्नी के साथ घर के अंदर सो रहे थे। अचानक तेज आवाज के साथ मकान की छत का एक हिस्सा टूट गया और मलबा व पानी घर के भीतर घुस गया। सतेश्वर प्रसाद की पत्नी किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहीं, लेकिन सतेश्वर मलबे के बीच घर के अंदर ही फंस गए।
घटना के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और करीब आधे घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद सतेश्वर प्रसाद को सुरक्षित बाहर निकाला। हादसे में उन्हें हल्की चोटें आई हैं, जबकि समय रहते राहत कार्य होने से बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुछ देर और हो जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
भारी बारिश और मलबे के कारण गांव में प्रताप सिंह की गोशाला भी क्षतिग्रस्त हो गई। गोशाला के प्रवेश द्वार पर मलबा भर जाने से अंदर मौजूद मवेशी फंस गए थे। सुबह होते ही ग्रामीणों ने मिलकर गोशाला का दरवाजा तोड़ा और सभी मवेशियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इससे पशुओं की जान बच गई।
बारिश के कारण गांव में व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ है। बरसाती पानी और मलबा 30 नाली से अधिक कृषि भूमि में फैल गया, जिससे खेतों में तैयार हो रही फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। कई पैदल मार्ग और संपर्क रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है। गांव के कई हिस्सों में मलबे के ढेर जमा होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण बदरी प्रसाद सुंद्रियाल सहित अन्य लोगों ने बताया कि कमेड़ा पानी क्षेत्र से बरसात के दौरान मलबा आने की समस्या पिछले तीन वर्षों से लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि हर वर्ष मानसून में गांव खतरे के साये में जीने को मजबूर होता है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान या विस्थापन की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, बीते वर्षों में भी इस क्षेत्र में मलबे की चपेट में आकर करीब 15 मकान और पांच गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। तहसीलदार महेंद्र आर्य ने बताया कि पगनो गांव में हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त हुई है। राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा जा रहा है ताकि नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी गांव का दौरा करेंगे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लेंगे। निरीक्षण रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर राहत और मुआवजे की आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के बीच प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। वहीं पगनो गांव के ग्रामीणों ने सरकार से कमेड़ा पानी क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपाय करने, प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने और लंबे समय से लंबित विस्थापन की मांग को जल्द पूरा करने की गुहार लगाई है।








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