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हाईकोर्ट ने शराब की दुकानों पर नई नीति बनाने के दिए निर्देश, स्थानीय लोगों की भावनाओं का रखने को कहा ध्यान

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग स्थित घटगढ़ में शराब की दुकान और उसके संचालक को सुरक्षा देने से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को शराब की दुकानों के लिए स्पष्ट और सुविचारित नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के आधार पर दोनों याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

याचिकाकर्ता बलवंत सिंह एवं अन्य ने हाईकोर्ट में बताया कि उन्हें मंगोली क्षेत्र में खुदरा मदिरा बिक्री का लाइसेंस मिला था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते दुकान को घटगढ़ स्थानांतरित करना पड़ा। वहां भी ग्रामीण लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है। उन्होंने दुकान और अपने लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि शराब की दुकानों के संचालन को लेकर नई आबकारी नीति तैयार की जा रही है। सरकार ने आश्वस्त किया कि भविष्य में किसी भी स्थान पर शराब की दुकान खोलने से पहले स्थानीय लोगों की राय, जनभावनाओं और सार्वजनिक हित का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूलों, आबादी वाले क्षेत्रों तथा महिलाओं और बच्चों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

हाईकोर्ट ने कहा कि शराब की दुकानों के लिए ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए जिससे स्थानीय निवासियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि नई नीति के तहत उचित निर्णय लेते हुए दुकानों के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाए।

इसी दौरान तकनीकी विश्वविद्यालय में संविदा कर्मचारियों को कोर्ट के आदेश के बावजूद हटाए जाने के मामले में भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को मंगलवार तक शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने या स्वयं उपस्थित होकर बताने के निर्देश दिए कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

वहीं, उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के खिलाफ अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि प्रस्तावित भूमि आरक्षित वन क्षेत्र में आती है और वहां निर्माण वन संरक्षण अधिनियम तथा वन संरक्षण नियमों का उल्लंघन होगा। साथ ही इससे महत्वपूर्ण हाथी कॉरिडोर और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने रुड़की के बहुचर्चित हत्याकांड के आरोपी जैद कुरैशी और अनस कुरैशी की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों आरोपियों पर हत्या और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

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Hill Mail

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