उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने यात्रा मार्ग में अव्यवस्थाओं और पशुओं के साथ हो रहे व्यवहार पर गंभीर चिंता जताई।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं और इनमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। कोर्ट ने तीर्थयात्रियों के साथ-साथ यात्रा में उपयोग हो रहे पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यात्रा मार्गों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी, भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की अपर्याप्तता पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब यह यात्रा हर वर्ष आयोजित होती है, तो व्यवस्थाएं समय रहते दुरुस्त क्यों नहीं की जातीं।
अदालत ने पशु अत्याचार के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया और यात्रा मार्गों पर पशु चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही, पशुओं के लिए उचित विश्राम स्थल, पानी और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य सरकार को जल्द से जल्द खामियों को दूर कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्यावरण और पशु संरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अदालत ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर जवाबदेही सुनिश्चित करने और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यवस्थाओं में सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि समय रहते सुधार नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।







