सांसद बलूनी संग गृह मंत्री अमित शाह ने मनाया इगास पर्व, एनएसए डोभाल समेत कई प्रमुख हस्तियां हुईं शामिल

सांसद बलूनी संग गृह मंत्री अमित शाह ने मनाया इगास पर्व, एनएसए डोभाल समेत कई प्रमुख हस्तियां हुईं शामिल

गढ़वाल सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के दिल्ली स्थित आवास पर इगास पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए अजीत डोभाल समेत अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए।

उत्तराखंड से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक इगास पर्व (बूढ़ी दिवाली) उत्साह और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया गया। लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी रही।

अनिल बलूनी के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, बाबा बागेश्वर धाम धीरेंद्र शास्त्री, और बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने इगास पूजन में भाग लिया।

लोक संस्कृति से जुड़ने का आह्वान

इस मौके पर सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि जिस प्रकार पूरे देश में सांस्कृतिक विरासत और गौरव की पुनर्स्थापना हो रही है, उसी तरह उत्तराखंडवासी भी अपने लोकपर्व इगास को उत्साह के साथ मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग इस पर्व के माध्यम से अपने पैतृक गांवों और लोक परंपराओं से दोबारा जुड़ रहे हैं।

बलूनी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी लोक संस्कृति और पर्वों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडियों से भी आग्रह किया कि वे अपने लोकपर्वों को अपने गांवों में मनाने का प्रयास करें।

दीपावली की रोशनी भले ही उतर चुकी थी, पर उत्तराखंड और देश के अन्य हिस्सों में इगास का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया गया। देवभूमि की इस परंपरा को लेकर लोगों में अपार उत्साह दिखा। घरों में दीये जलाए गए, पारंपरिक व्यंजन बनाए गए और लोकगीतों की गूंज से वातावरण पर्वमय बन गया।

पर्व की पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्रभु श्रीराम के वनवास से लौटने की सूचना हिमालयी अंचल तक 11 दिन बाद पहुंची थी। इसी कारण यहां दीपावली के बजाय बूढ़ी दिवाली या इगास कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन मनाई जाती है।

इगास पर्व से जुड़ी एक ऐतिहासिक कथा टिहरी गढ़वाल क्षेत्र से संबंधित है। कहा जाता है कि टिहरी राजशाही के समय वीर माधो सिंह भंडारी, राजा के आदेश पर अपनी सेना के साथ चीन सीमा (तिब्बत) पर युद्ध लड़ने गए थे। दीपावली तक वे लौट नहीं पाए, तो लोगों ने मान लिया कि वे वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।

लेकिन दीपावली के 11वें दिन यह शुभ सूचना मिली कि उन्होंने युद्ध में विजय प्राप्त की है और सेना सहित वापस लौट रहे हैं। उसी दिन से टिहरी में इगास मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

भैलो में दिखती है इस पर्व की विशिष्ट छटा

मैदानों में जहां दीपावली पटाखों के साथ मनाई जाती है, वहीं पहाड़ों में भैलो खेलकर इस पर्व की विशिष्ट छटा देखने को मिलती है। इसमें चीड़ की सूखी लकड़ियों के गट्ठर रस्सियों से बांधकर जलाए जाते हैं और सामूहिक रूप से घुमाए जाते हैं। इस दौरान लोकगीत ‘भैलो रे भैलो, काखड़ी को रैलू, उज्यालू आलो अंधेरो भगलू…’ गूंजते हैं। चांचड़ी और झुमेलो जैसे पारंपरिक नृत्य तथा देवी-देवताओं की जागर के साथ पर्व की सांस्कृतिक आत्मा झलकती है।

लोक अस्मिता और विरासत का प्रतीक

इगास केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, लोक गौरव और संस्कृति का प्रतीक है। यह पर्व हमारी मिट्टी की खुशबू, बोली की मधुरता और लोक परंपरा की जीवंत पहचान है। हमारा नैतिक दायित्व है कि सदियों पुरानी इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक व्यापक रूप में पहुंचाया जाए।

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